BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 07 मार्च, 2005 को 01:52 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
रम्सफ़ेल्ड का एजेंट की मौत पर अफ़सोस
एजेंट का शव
इतालवी ख़ुफ़िया एजेंट का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ हो रहा है
अमरीका के रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने इराक़ में अमरीकी सैनिकों की गोलीबारी में इतालवी ख़ुफ़िया सेवा के एक एजेंट की मौत पर पुनः खेद प्रकट किया है.

निकोला कैलीपारी नामक इतालवी एजेंट की तब मौत हो गई जब वो एक इतालवी महिला बंधक को छुड़ाकर एक कार से लौट रहे थे कि अमरीकी सैनिकों ने उनपर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं.

इतालवी ख़ुफ़िया एजेंट निकोला कैलीपारी का अंतिम संस्कार सोमवार को राजकीय सम्मान के साथ होगा.

इटली के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा उनका शव वित्तोरियानो स्मारक के पास रखा गया है जहाँ हज़ारों लोगों ने फूल-मालाओं से और संदेश लिखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है.

निकोला कैलीपारी इराक़ में बंधक बनाई गई महिला पत्रकार जूलियाना ज्ग्रेना को छुड़ाकर ले जा रहे थे जब अमरीकी सैनिकों ने उन्हें गोली मार दी.

आरोप और खंडन

 मैं नहीं बता सकती मगर मैं समझती हूँ कि हमें इस घटना की सफ़ाई देनी होगी क्योंकि एक सामान्य घटना नहीं है.
जूलियाना ज़्ग्रेना

जूलियाना भी घायल हो गईं और रोम में एक सैनिक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि ये कार एक नाके की और तेज़ी से बढ़ रही थी और उसपर गोलियाँ तब चलाई गईं जब चेतावनी के बाद भी उसे नहीं रोका गया.

मगर जूलियाना ज़्ग्रेना ने इस बयान को ग़लत बताया है और कहा है कि वहाँ ना तो कोई नाका था, ना ही कोई चेतावनी दी गई और ना ही कार तेज़ गति से जा रही थी.

उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता कि क्यों उनकी कार पर गोलियाँ चलाई गईं.

उन्होंने कहा,"मैं नहीं बता सकती मगर मैं समझती हूँ कि हमें इस घटना की सफ़ाई देनी होगी क्योंकि एक सामान्य घटना नहीं है. हम आतंकवादी नहीं थे, हम केवल वो लोग थे जो दूतावास के लिए काम कर रहे थे या पत्रकार थे."

अपहरण और असर

जूलियाना ज्ग्रेना को चार फ़रवरी को बग़दाद विश्वविद्यालय के बार कुछ बंदूकधारियों ने अग़वा कर लिया था.

उनकी रिहाई कैसे हुई इस बारे में ना तो इतालवी और ना ही अमरीकी अधिकारियों ने कुछ बताया है मगर ऐसी अटकलें हैं कि उन्हें फ़िरौती देकर छुड़ाया गया.

बहरहाल इस गोलीबारी से उस इटली में एक बार फिर अमरीका विरोधी भावना ने ज़ोर पकड़ लिया है जहाँ के लोगोंने इराक़ युद्ध का खुलकर विरोध किया था.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हालाँकि अमरीका ने इस घटना की जाँच की घोषणा कर दी है लेकिन फिर भी ऐसा काफ़ी संभावना है कि इटली पर इराक़ से अपने सैनिक हटाने के लिए दबाव बढ़ेगा.

इटली के क़रीब तीन हज़ार सैनिक इराक़ में हैं और वहाँ सैनिक भेजे जाने का इटली में काफ़ी विरोध हुआ था.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>