BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 25 जनवरी, 2005 को 18:16 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सद्दाम हुसैन के बाद का इराक़
सद्दाम हुसैन
सद्दाम हुसैन कई दशक तक शासन किया
इराक़ पर अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के मार्च 2003 में हमले के बाद से अब तक बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएँ हो चुकी हैं. यहाँ पेश है सद्दाम हुसैन का शासन समाप्त होने के बाद कुछ महत्वपूर्ण पड़ावों का ब्यौरा.

09 अप्रैल 2003
सद्दाम शासन की समाप्ति
सद्दाम हुसैन की सरकार को गिरा दिया गया. अमरीकी सेनाएँ राजधानी बग़दाद के केंद्रीय इलाक़ों की तरफ़ बढ़ती हैं जिसके बाद सद्दाम हुसैन सरकार का नियंत्रण राजधानी के ज़्यादातर इलाक़ों से ख़त्म हो जाता है. सद्दाम हुसैन की एक मूर्ति को जब अमरीकी सैनिक तोड़ते हैं तो वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने मूर्ति पर अपना ग़ुस्सा उतारा. अमरीकी सैनिकों ने इसे एक प्रतीकात्मक घटना बताया.

15 अप्रैल, 2003
अमरीका ने इराक़ के भविष्य पर काम करना शुरू किया
अमरीका द्वारा प्रायोजित एक बैठक में इराक़ी प्रतिनिधित्व इराक़ में एक लोकतांत्रिक और संघीय व्यवस्था क़ायम करने पर राज़ी हुए. सद्दाम हुसैन का शासन ख़त्म होने के बाद नई व्यवस्था स्थापित करने का यह पहला प्रयास था. अमरीकी राष्ट्रपति के विशेष दूत ज़लमय ख़लीलज़ाद ने बैठक में आए प्रतिनिधियों से कहा कि अमरीका इराक़ में शासन करने के लिए बिल्कुल भी इच्छुक नहीं है.

एक मई, 2003
युद्ध समाप्ति की घोषणा
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक़ में मुख्य युद्ध समाप्त होने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि इस युद्ध में अमरीका की जीत हुई है और मुख्य हमले रोके जा रहे हैं लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इराक़ में अब भी काम बहुत मुश्किल है.

6 मई, 2003
इराक़ को नया अमरीकी प्रशासक मिला
राष्ट्रपति बुश ने पॉल ब्रेमर को इराक़ में सर्वोच्च प्रशासक नियुक्त किया. उनका काम लोकतंत्र की तरफ़ बढ़त में तालमेल बिठाना था. पॉल ब्रेमर को इराक़ में पुनर्निर्माण कार्यों के प्रभारी और रिटायर्ड जनरल जे गार्नर से ऊँचा दर्जा दिया गया.

22 मई, 2003
संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ के ख़िलाफ़ प्रतिबंध उठाए
संयुक्त राष्ट्र ने बड़े बहुमत से उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें इराक़ पर से प्रतिबंध हटाने की पेशकश की गई थी और इराक़ में अमरीकी प्रशासन को समर्थन दिया गया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 में से 14 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया. केवल सीरिया एक ऐसा अरब देश रहा जिसने बैठक का बहिष्कार किया.

सद्दाम हुसैन

23 मई, 2003
सद्दाम हुसैन की संस्थाओं को समाप्त किया गया
पॉल ब्रेमर ने सद्दाम हुसैन के शासनकाल के मंत्रालयों और सभी सत्ता ढाँचे को ख़त्म किया. इराक़ी सेना को भी भंग कर दिया गया. उससे पहले बाथ पार्टी के हज़ारों सदस्यों को सरकारी नौकरियों के अयोग्य घोषित कर दिया गया था.

13 जुलाई, 2003
स्वशासन की तरफ़ इराक़ की बढ़त
इराक़ी शासकीय परिषद की पहली बैठक हुई. इसके सदस्यों को अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने नियुक्त किया. परिषद का काम संविधान बनाने में मदद करना था. पॉल ब्रेमर परिषद बनने के बावजूद इराक़ के सर्वोच्च प्रशासक बने रहे.

16 जुलाई, 2003
गुरिल्ला युद्ध
अमरीका ने माना कि वह गुरिल्ला युद्ध का सामना कर रहा है
इराक़ में अमरीकी सैन्य अभियानों के प्रभारी ने स्वीकार किया कि अमरीकी सेना के ख़िलाफ़ हमले गुरिल्ला युद्ध की तर्ज़ पर हो रहे हैं. अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अभी तक इन हमलों को बाथ पार्टी के बचे-खुचे कार्यकर्ताओं के छुटपुट हमले क़रार दिया था.

22 जुलाई, 2003
सद्दाम हुसैन के दोनों बेटे
अमरीकी सैनिकों ने उत्तरी शहर मूसल में एक घर पर हमला करके सद्दाम हुसैन के दोनों बेटों - उदय और क़ूसै को मार दिया. समझा गया कि अमरीकी सेनाओं को किसी ने उनके ठिकानों के बारे में ख़ुफ़िया जानकारी दी थी. अमरीकी सेना ने बाद में लोगों का शक दूर करने और यह भरोसा दिलाने के लिए शवों की तस्वीरें भी जारी कीं कि मारे गए दोनों लोग दरअसल सद्दाम हुसैन के बेटे ही थे.

19 अगस्त, 2003
संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तर पर हमला
राजधानी बग़दाद में संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तर पर एक भारी बम हमला हुआ जिसमें कम से कम 20 लोग मारे गए. मारे गए लोगों में संयुक्त राष्ट्र दूत सर्गियो वियेरा डी मेलो भी थे. हमले में 100 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए. इस आत्मघाती हमले के बाद अनेक अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने बग़दाद से अपने कर्मचारियों को हटा लिया.

29 अगस्त, 2003
हमले में शिया नेता की मौत
शिया बहुल शहर नजफ़ में एक कार बम विस्फोट में प्रमुख शिया नेता आयतुल्ला मोहम्मद बक़्र अल हकीम सहित क़रीब 90 लोग मारे गए. यह धमाका हज़रत अली की दरगाह के नज़दीक हुआ. शिया मुसलमानों में यह दरगाह बहुत पवित्र मानी जाती है. बहुत से शियाओं ने इस हमले के लिए सद्दाम हुसैन के समर्थकों को ज़िम्मेदार ठहराया.

सद्दाम हुसैन

16 अक्तूबर, 2003
इराक़ पर नए प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक़ के राजनीतिक भविष्य का ख़ाका पेश करने वाले प्रस्ताव का सर्वसम्मति से पारित किया. प्रस्ताव में मुख्य भूमिका और अधिकार अमरीकी प्रशासन के ही रहे लेकिन यह आहवान भी किया गया कि जब भी संभव हो, देश की सरकार और संप्रभुता इराक़ी लोगों को सौंप दी जाए.

23 अक्तूबर, 2003
पुनर्निर्माण योजना पर चर्चा
इराक़ में पुनर्निर्माण के लिए धन देने वाले 80 देशों की दो दिन की बैठक में 13 अरब डॉलर देने का वादा किया गया. इससे पहले अमरीका अलग से 20 अरब डॉलर देने की पेशकश कर चुका था. संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक ने अनुमान लगाया था कि इराक़ को चार साल में क़रीब 56 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी.

27 अक्तूबर, 2003
रमज़ान के मौक़े पर हमलों से देश दहला
रमज़ान के पवित्र महीने के पहले दिन ही इराक़ में आत्मघाती हमलों में कम से कम 35 लोग मारे गए और सैकड़ों अन्य घायल हो गए. ये हमले राजधानी बग़दाद में रेडक्रास के दफ़्तर और पाँच थानों पर हुए.

2 नवंबर, 2003
अमरीकी हेलिकॉप्टर गिराया
चरमपंथियों ने अमरीका का शिनूक हेलीकॉप्टर मार गिराया जिसमें 15 अमरीकी सैनिक मारे गए और 21 घायल हो गए. युद्ध शुरू होने के बाद से यह बहुत बड़ा अमरीकी नुक़सान था.

12 नवंबर, 2003
इटली के सैन्य मुख्यालय पर हमला
इराक़ के दक्षिणी शहर नसीरिया में इटली के सैन्य मुख्यालय पर आत्मघाती हमला हुआ जिसमें इटली के 16 सैनिक और दो असैनिक मारे गए. इनके अलावा आठ इराक़ी भी इस हमले का शिकार बने.

15 नवंबर, 2003
सत्ता हस्तांतरण के लिए समय सारिणी
इराक़ की अंतरिम शासकीय परिषद ने ऐलान किया कि अमरीकी नेतृत्व वाला गठबंधन जून 2004 में सत्ता एक अंतरिम सरकार को सौंप देगा. यह सरकार जनवरी 2005 में आम चुनाव के लिए रास्ता तैयार करेगी.

सद्दाम हुसैन

13 दिसंबर, 2003
सद्दाम हुसैन को पकड़ा
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को अमरीकी सैनिकों ने पकड़ा. वह तिकरित शहर के एक घर में छुपे हुए पाए गए और उन्होंने बिना किसी लड़ाई के ही समर्पण कर दिया.

एक मार्च, 2004
अंतरिम संविधान पर सहमति
अंतरिम शासकीय परिषद ने एक अंतरिम संविधान को सहमति दी. संविधान में तमाम क़ानूनों का स्रोत इस्लाम को बताया गया. इसमें कुर्दों को भी कुछ स्वायत्तता दी गई.

चार अप्रैल, 2004
कई शहरों में शियाओं का विद्रोह भड़का
बग़दाद, बसरा और नजफ़ में शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों और विदेशी सैनिकों के बीच लड़ाई भड़की जिसमें कम से कम 40 शिया विद्रोही मारे गए. इसके बाद कई महीने तक दोनों पक्षों के बीच भयंकर हिंसा होती रही.

20 अप्रैल, 2004
सद्दाम हुसैन पर मुक़दमे के लिए अदालत
सद्दाम हुसैन और बाथ पार्टी के अन्य पदाधिकारियों पर मुक़दमा चलाने के लिए एक विशेष अदालत गठित की गई.

29 अप्रैल, 2004
अबू ग़रेब मामला
बग़दाद की अबू ग़रेब जेल में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरें
बग़दाद की अबू ग़रेब जेल में अमरीकी सैनिकों के हाथों क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरे सामने आने से बवाल मच गया. इन तस्वीरों में क़ैदियों को नंगी अवस्था में दिखाया गया जिन्हें कुत्तों से डराया जा रहा था. इस मामले में अनेक सैनिकों को आरोपों का सामना करना पड़ा.

ईयाद अलावी

28 मई, 2004
ईयाद अलावी अंतरिम प्रधानमंत्री
इराक़ी शासकीय परिषद ने ईयाद अलावी को अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री नियुक्त किया और अंतरिम सरकार ने 30 जून को कार्यभार संभालना था. दो दिन बाद अलावी ने अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्यों के नामों की घोषणा की. इसके साथ ही शासकीय परिषद भंग हो गई.

28 जून, 2004
सत्ता हस्तांतरण
निर्धारित तारीख़ से दो दिन पहले ही 28 जून को अमरीकी गठबंधन ने सत्ता अंतरिम सरकार को सौंप दी. एक सादे समारोह में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर ने देश छोड़ने से पहले एक जज को सत्ता सौंपी. बाद में ईयाद अलावी की अंतरिम सरकार ने शपथ ग्रहण की.

एक जुलाई, 2004
सद्दाम हुसैन पर मुक़दमा शुरू
सद्दाम हुसैन ने अदालत में पेशी पर तमाम आरोपों को नकारा और अदालत की संवैधानिक स्थिति को भी चुनौती दी. उन्होंने राष्ट्रपति बुश को 'असल अपराधी' कहकर पुकारा.

15 नवंबर, 2004
फ़लूजा पर नियंत्रण
अमरीकी सेनाओं ने सुन्नी बहुल शहर फ़लूजा पर कई दिन की भीषण लड़ाई के बाद फिर से नियंत्रण किया. अमरीकी कमांडरों ने कहा कि 1200 से ज़्यादा विद्रोही मारे गए. वहाँ अप्रैल से ही विद्रोहियों का नियंत्रण था.

22 नवंबर, 2004
आम चुनाव की तारीख़ घोषित
आम चुनाव के लिए 30 जनवरी, 2005 का दिन तय किया गया.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>