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इराक़ चुनाव में सुरक्षा की चुनौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में लगातार जारी हिंसा को देखते हुए वहाँ चुनाव का इंतज़ाम करने वालों को यह अनुमान लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है कि चरमपंथी मतदान के समय भी हिंसक हमले करने की योजना बना रहे हैं. इराक़ प्रशासकों का कहना है कि मतदान पूरे देश में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तीस जनवरी को ही होगा और जिसके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए जा रहे हैं. इराक़ के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के साथ काम कर रहे एक सुरक्षा सूत्र ने बीबीसी को बताया, "हर एक प्रांत के सभी इलाक़ों में मतदान के लिए सुरक्षा तैयारियाँ ज़ोरशोर से चल रही हैं." अधिकारियों ने कहा है कि चुनाव के वक़्त पर तीन दिन के लिए इराक़ की सीमाएँ सभी तरफ़ से सील कर दी जाएँगी. अमरीका और इराक़ ने बार-बार कहा है कि देश में चरमपंथी गतिविधियों को बाहर से बढ़ावा मिल रहा है, ख़ासतौर से सीरिया से. मतदान कर्मचारियों का इरादा है कि कई स्थानों पर मतदान केंद्रों की जगह के बारे में जानकारी अंतिम समय तक गुप्त रखी जाए, ख़ासतौर से सीरिया की सीमा से मिलने वाले इलाक़ों में. चुनाव प्रबंध करने वालों के लिए एक बड़ी चुनौती यह भी होगी कि मतदान केंद्रों के बाहर लाइन लगाने वालों और बड़े-बड़े समूहों में मतदान के लिए आने वालों को कैसे संभाला जाए. अधिकारियों ने कहा कि मतदान के दौरान उन्हीं वाहनों को सड़कों चलने की इजाज़त दी जाएगी जिनके पास सरकारी परमिट होगा ताकि कार बम हमलों से बचने में मदद मिल सके. छुट्टी और कर्फ़्यू मतदान के आसपास तीन दिन सरकारी छुट्टी घोषित की गई है आम लोगों और चरमपंथियों को सड़कों से दूर रखने के लिए कर्फ़्यू जारी रहेगा. हथियार ले जाने पर भी पाबंदी होगी और बग़दाद हवाई अड्डा दो दिन के लिए बंद रहेगा.
इराक़ के क्षेत्रीय मामलों के मंत्री वाएल अब्दुल लतीफ़ ने कहा ज़्यादातर सुरक्षा का इंतज़ाम इराक़ी सुरक्षा बलों के हाथों में ही होगा. "उन्होंने कहा, "बहुराष्ट्रीय सेनाओं के साथ भी तालमेल रखा जाएगा लेकिन इस चुनाव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने की सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदारी इराक़ी सुरक्षा बलों पर ही होगी." अमरीकी सैन्य कमांडरों का कहना है कि अगर इराक़ी सुरक्षा बलों को किसी तरह की समस्या होती है तो उनके सैनिक भी बिल्कुल तैयार अवस्था में रहेंगे. इराक़ी प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने पिछले सप्ताह स्वीकार किया था कि सुरक्षा चिंताओं की वजह से देश के कुछ इलाक़े मतदान में भाग नहीं ले पाएँगे. इराक़ में अमरीकी राजदूत जॉन नीग्रोपोंटे ने भी सोमवार को स्वीकार किया कि चरमपंथियों ने चुनाव के लिए गंभीर ख़तरा पैदा कर दिया है लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि इस बात के पुख़्ता इंतज़ाम और प्रयास किए जा रहे हैं कि इराक़ी लोग मतदान कर सकें.
लेकिन आंतरिक मामलों के मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि मतदान देश के सभी हिस्सों में कराने की योजना बनाई गई है. अमरीकी कमांडरों ने कहा है कि यहाँ तक कि उनके नियंत्रण वाले बेहद ख़तरनाक इलाक़ों में भी मतदान होगा. लैफ़्टिनेंट जनरल जॉन सैटलर ने कहा, "सुन्नी बहुल अल अनबर प्रांत में भी मतदान होगा जहाँ जहाँ इराक़ी और अमरीकी सैनिकों पर बहुत से हमले हो चुके हैं." "अगर आप फ़लूजा में हैं तो वहीं मतदान कर सकते हैं, अगर आप रमादी में हैं तो निश्चित रूप से रमादी में ही मतदान कर सकते हैं. मतदान सुरक्षित होगा." अमरीकी सेना हिंसाग्रस्त रहे मोसूल में मतदान सुचारू रूप से होने के लिए आशान्वित है. |
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