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रविवार, 23 जनवरी, 2005 को 15:26 GMT तक के समाचार
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'ज़रक़ावी के टेप' में जंग का ऐलान
ज़रक़ावी
'ज़रक़ावी' ने शिया नेताओं को भी निशाना बनाया
चरमपंथी नेता अबू मुसाब ज़रक़ावी ने अपने एक कथित ऑडियो टेप में अगले रविवार को इराक़ में होने वाले चुनाव के ख़िलाफ़ जंग का ऐलान किया है.

एक इस्लामी वेबसाइट पर ज़रक़ावी का यह कथित टेप जारी हुआ है. टेप में इराक़ के सुन्नी मुसलमानों से अपील की गई है कि इराक़ी चुनाव के ख़िलाफ़ संघर्ष करें.

ऑडियो टेप में कहा गया है, "हमने लोकतंत्र के सिद्धांत के ख़िलाफ़ संघर्ष का ऐलान किया है और उनके ख़िलाफ़ भी जो इसे लागू करने की कोशिश कर रहे हैं."

इराक़ में कई बम हमलों और विदेशियों के सिर काटने की ज़िम्मेदारी ज़रक़ावी ने ली है. अमरीका ने ज़रक़ावी पर दो करोड़ 50 लाख डॉलर का ईनाम रखा है.

संवाददाताओं का कहना है कि टेप की आवाज़ उस आवाज़ से मिलती है जो पहले अबू मुसाब ज़रक़ावी की मानी गई है.

ज़रक़ावी गुट को ओसामा बिन लादेन के अल क़ायदा से संबंधित माना जाता है.

'लोकतंत्र'

ताज़ा टेप में लोकतंत्र के सिद्धांत की तुलना 'एक डूबते-उतराते तख्ते' से की गई है जिसे ग़ैर इस्लामी व्यवहार कहा गया है.

 हमने लोकतंत्र के सिद्धांत के ख़िलाफ़ संघर्ष का ऐलान किया है और उनके ख़िलाफ़ भी जो इसे लागू करने की कोशिश कर रहे हैं
टेप में कहा गया

टेप में कहा गया है, "उम्मीदवार ख़ुदा का अवतार बनने की कोशिश कर रहे हैं और जो लोग मतदान करने की सोच रहे हैं वे काफ़िर हैं."

टेप में शिया समुदाय को भी निशाना बनाया गया है जो चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. टेप में कहा गया है कि शिया बग़दाद और इराक़ के सुन्नी बहुल इलाक़ों में अपना 'कपटपूर्ण विश्वास' फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.

ज़रक़ावी ने इराक़ के कई शिया ठिकानों पर हमलों की ज़िम्मेदारी ली है. इनमें 2003 का वह कार बम हमला भी शामिल है जिसमें इराक़ के एक प्रमुख शिया पार्टी के पूर्व नेता अयातुल्ला मोहम्मद बक़र अल हकीम मारे गए थे.

इस सप्ताह के शुरू में भी ज़रक़ावी का एक कथित टेप जारी हुआ था जिसमें चुनाव में हिस्सा ले रहे शिया नेताओं की आलोचना की गई थी और शिया धार्मिक नेता अयातुल्ला अल सिस्तानी को 'शैतान' तक कहा गया था.

इस बीच इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने बीबीसी के एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए बताया कि उन्हें उम्मीद है कि चुनाव के बाद इराक़ में हिंसा ख़त्म हो जाएगी.

लेकिन उन्होंने यह भी माना कि यह जल्दी नहीं होगा और कुछ समय तक हमले जारी रह सकते हैं.

30 जनवरी को होने वाले चुनावों के लिए इराक़ की अंतरिम सरकार ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है. तीन दिनों के लिए इराक़ की सीमा बंद रखी जाएगी.

रात का कर्फ़्यू कई इलाक़ों में जारी रहेगा और राजधानी बग़दाद का हवाई अड्डा भी दो दिनों तक बंद रहेगा.

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