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बग़दाद के उच्च सुरक्षा इलाक़े में विस्फोट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ की राजधानी बग़दाद में उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र ग्रीन ज़ोन में सोमवार को एक बड़ा बम धमाका हुआ है जिसमें कम से कम दस लोग ज़ख़्मी हो गए. इस क्षेत्र में सरकारी इमारतें और अमरीकी दूतावास स्थित है. ग़ौरतलब है कि इराक़ में रविवार, तीस जनवरी को चुनाव होने वाले हैं और यह विस्फोट उन चुनावों से सिर्फ़ छह दिन पहले हुआ है. प्रधानमंत्री ईयाद अलावी की पार्टी का दफ़्तर भी इसी क्षेत्र में है और बम विस्फोट दफ़्तर के पास ही एक चौकी पर हुआ. ईयाद अलावी इस वक़्त उस इलाक़े में नहीं थे लेकिन पार्टी के कई कार्यकर्ता घायल हो गए क्योंकि वे उस समय दफ़्तर की तरफ़ जा रहे थे. अधिकारियों ने कहा है कि एक ड्राइवर ने विस्फोटों से भरी एक कार चौकी से टकरा दी. एक इस्लामी वेबसाइट पर प्रकाशित संदेश में इस विस्फोट की ज़िम्मेदारी ज़रक़ावी के संगठन ने ली है. एक दिन पहले ही इंटरनेट पर रखी गई एक आवाज़ ने इराक़ के सुन्नियों से चुनाव के ख़िलाफ़ लड़ाई करने का आहवान किया था और इस आवाज़ को ज़रक़ावी की बताया गया था. इस बीच इराक़ी सरकार ने कहा कि ज़रक़ावी के संगठन के एक वरिष्ठ सलाहकार को गिरफ़्तार किया गया है. इस सलाहकार का नाम अबू उमर अल कुर्दी बताया गया है. सरकार की तरफ़ से कहा गया है कि कम से कम तीस कार बम हमलों में कुर्दी का हाथ रहा है. इनमें 2003 में बग़दाद में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुआ बम विस्फोट भी शामिल है जिसमें संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि सर्गियो वियेरा डी मैलो भी मारे गए थे. नीग्रोपोंटे उधर इराक़ में अमरीकी राजदूत जॉन नीग्रोपोंटे ने स्वीकार किया है कि चरमपंथियों ने अगले रविवार को होने वाले चुनाव के लिए गंभीर ख़तरा पैदा कर दिया है.
लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि इस बात के पुख़्ता इंतज़ाम और प्रयास किए जा रहे हैं कि इराक़ी लोग मतदान कर सकें. नीग्रोपोंट ने कहा है कि इन चुनावों को सिर्फ़ इस आधार पर नहीं आँका जाना चाहिए कि उसमें कितने प्रतिशत मतदान होगा, दरअसल इन चुनावों का होना ही एक बड़ी कामयाबी गिनी जानी चाहिए. उन्होंने माना कि सुन्नी इलाक़ों में कुछ समस्याएँ हैं और वहीं पर चरमपंथियों को गढ़ हैं, लेकिन ज़्यादातर इलाक़ों में लोगों को घर से निकलकर मतदान करना सुरक्षित होगा. अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी पिछले सप्ताह कह चुके हैं कि चुनावों के लिए पूरी तरह सुरक्षा प्रदान कराना संभव नहीं होगा और जो क़दम उठाए भी जा रहे हैं वो पर्याप्त नहीं हैं. |
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