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'बुश की जीत से दुनिया असुरक्षित' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसमें कोई शक नहीं कि आज के दौर में अमरीकी राष्ट्रपति दुनिया में सबसे ताक़तवर नेता और राष्ट्राध्यक्ष होता है लेकिन उसकी लोकप्रियता पर मिली-जुली राय रहती है. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का इस पद पर दूसरा कार्यकाल गुरूवार, बीस जनवरी 2005 को शुरू हो रहा है. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने दुनिया में जॉर्ज बुश की लोकप्रियता जानने के 21 देशों में सर्वेक्षण किए जिनमें से ज़्यादातर में पाया गया कि बुश के फिर से राष्ट्रपति बनने से दुनिया और ज़्यादा असुरक्षित हुई है. सिर्फ़ तीन ऐसे देश रहे - भारत, पोलैंड और फ़िलीपीन्स, जिनमें सर्वेक्षण में ज़्यादातर लोगों ने कहा कि बुश के दोबारा राष्ट्रपति बनने से दुनिया ज़्यादा सुरक्षित हुई है. सर्वेक्षण में पाया गया कि 47 प्रतिशत लोग दुनिया पर अमरीका के प्रभाव को नुक़सानदेह मानते हैं और ऐसी ही भावनाएँ अमरीकियों के लिए भी पाई गईं. जिन देशों में यह सर्वेक्षण किए गए उनमें से किसी ने भी इराक़ में अपने सैनिक नहीं भेजे हैं. यह सर्वेक्षण प्रोग्राम ऑन इंटरनेशनल पॉलिसी एट्टीट्यूड (पीआईपीए) ने ग्लोबस्कैन के साथ मिलकर किया.
पीआईपीए के निदेशक स्टीवन कुल ने कहा, "अमरीका के लिए यह काफ़ी निराशाजनक तस्वीर है. बुश के बारे में नकारात्मक विचार बहुत ज़्यादा हैं और ऐसे ही विचार अमरीकियों के लिए भी बढ़ रहे हैं क्योंकि उन्होंने बुश को दोबारा राष्ट्रपति चुना है." औसतन 58 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनका मानना है कि बुश के दोबारा राष्ट्रपति बनने से दुनिया और ज़्यादा ख़तरनाक हुई है. ज़्यादा नकारात्मक विचार पश्चिमी यूरोप, लातीनी अमरीकी और मुस्लिम देशों में पाए गए. इनमें जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों में पाए गए हैं जो परंपरागत रूप में अमरीका के सहयोगी देश रहे हैं. पोलैंड सिर्फ़ एक ऐसा यूरोपीय देश रहा जहाँ लोगों ने बुश और अमरीका का समर्थन किया. पोलैंड हाल ही में यूरोपीय संघ में शामिल हुआ है. बुश विरोधी विचारों में तुर्की सबसे आगे रहा जहाँ 82 प्रतिशत लोगों का मानना था कि बुश के दोबारा राष्ट्रपति बनने से दुनिया की सुरक्षा को ख़तरा पैदा होगा. ब्रसेल्स में बीबीसी संवाददाता क्रिस मोरिस का कहना है यह राष्ट्रपति बुश के लिए अच्छी ख़बर नहीं है क्योंकि तुर्की अमरीका का एक प्रमुख मुस्लिम सहयोगी देश है और यह उत्तर अटलांटिक संधि संगठन - नाटो का एक मात्र मुस्लिम सदस्य देश भी है.
इंडोनेशिया और लेबनान जैसे अन्य मुस्लिम देशों में भी बुश विरोधी विचार काफ़ी प्रमुखता से उभरकर सामने आए. लेकिन बीबीसी संवाददाता डैन इसाक्स का कहना है कि सूनामी लहरों से हुई तबाही के बाद इंडोनेशिया में अमरीकी मदद के बाद के हालात के बारे में इस सर्वेक्षण में कुछ पता नहीं चला क्योंकि यह सर्वेक्षण इस तबाही से पहले किया गया था. आर्थिक प्रगति लातीनी अमरीका में भी बुश विरोधी विचार प्रमुखता से पाए गए जहाँ अर्जेंटीना में 79 प्रतिशत लोगों ने और ब्राज़ील में 78 प्रतिशत लोगों ने तुर्की का ही रास्ता अपनाया. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह चौंकाने वाली बात लगती है क्योंकि इस क्षेत्र में अमरीकी विदेश नीति का कोई सीधा दख़ल नहीं है. एक और चौंकाने वाली बात थी कि भारत में बुश के समर्थन में विचार उभरे. सर्वेक्षण में भाग लेने वालों में से 62 प्रतिशत लोगों का मानना था कि बुश के दोबारा राष्ट्रपति बनना दुनिया की सुरक्षा के लिए अच्छा है. बीबीसी संवाददाता निक ब्रायंट का कहना है कि इसकी वजह शायद यह हो सकती है कि भारत में यह सर्वेक्षण ऐसे चार महानगरों में किया गया जहाँ लोगों को अमरीका के साथ व्यापारिक संबंधों से फ़ायदा होता है. ग्लोब स्कैन के अध्यक्ष डाउग मिलर का कहना है कि यह सर्वेक्षण से "कुछ अमरीकियों के इन विचारों को बल मिलता है कि बुश प्रशासन अगर अपने दूसरे कार्यकाल में दुनिया के मामले में अगर अपने रवैये में सुधार नहीं करता है तो इसकी छवि और ख़राब होती जाएगी और अंततः इसका असर विश्व मामलों को प्रभावित करने की अमरीकी क्षमता पर पड़ेगा." |
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