| 'समय पर होंगे इराक़ में चुनाव' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने उम्मीद जताई है कि इराक़ में चुनाव समय पर होंगे. इराक़ में इस महीने की 30 तारीख़ को चुनाव होने वाले हैं. लेकिन हिंसा की बढ़ती घटनाओं के कारण कई तरह की आशंकाएँ जताई जा रही थीं. वाशिंगटन में अमरीका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों को बताया कि वे चाहते हैं कि इराक़ में चुनाव के बाद ऐसी सरकार का गठन हो जिसमें इराक़ी लोगों का प्रतिनिधित्व हो. बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता रॉब वॉटसन का कहना है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के दूसरे कार्यकाल की परख इसके आधार पर ज़्यादा होगी कि इराक़ में क्या होता है. इराक़ में 30 जनवरी को होने वाले चुनाव जॉर्ज बुश के दूसरे कार्यकाल की पहली बड़ी परीक्षा होंगे. इराक़ चुनाव पर लगाई जा रही बड़ी आस को देखते हुए बुश प्रशासन ने इस पर टिप्पणी करनी शुरू कर दी है. प्रतिनिधित्व इराक़ी चुनाव के पहले इस बारे में पत्रकारों से बात करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि चुनाव पूरी तरह सही तो नहीं हो पाएँगे.
लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव के बाद ऐसी सरकार का गठन होगा जिसमें इराक़ी लोगों का प्रतिनिधित्व होगा. अधिकारियों ने बताया कि ज़्यादातर इराक़ी मतदान में हिस्सा लेना चाहते हैं. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो इसका कारण उनमें उत्साह की कमी नहीं बल्कि उन्हें डराया-धमकाया जाना होगा. अधिकारियों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सुन्नी अरबों को मतदान करने के लिए मनाने की कोशिशें हो रहीं हैं. लेकिन अधिकारियों ने ये नहीं बताया कि कितने फ़ीसदी मतदान को वे सफल मानेंगे. अमरीकी राजनेताओं में इराक़ी चुनाव को लेकर काफ़ी मतभेद है. बुश प्रशासन के समर्थक इसे इराक़ में लोकतंत्र और मध्य पूर्व में शांति की दिशा में बड़ा क़दम मान रहे हैं. जबकि उनके विरोधियों का कहना है कि इराक़ में गृह युद्ध भड़क सकता है और इसलिए चुनाव की तिथि आगे बढ़ा देनी चाहिए. |
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