|
हिंसा से इराक़ी चुनावों पर संकट के बादल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक तरफ़ जब पूरी दुनिया का ध्यान एशिया में आए भूकंप और उसके बाद सूनामी लहरों से हुई तबाही पर है वहीं दूसरी तरफ़ इराक़ में स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. वहाँ विद्रोह ने लगभग युद्ध की शक्ल ले ली है. इराक़ के ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख जनरल मुहम्मद शाहवानी के अनुसार देश में क़रीब दो लाख विद्रोही है. जिनमें से 40 हज़ार कट्टरपंथी है और बाक़ी उनके सक्रिय समर्थक. अगर इन आंकणों पर ध्यान दिया जाए तो ये सिर्फ़ विद्रोह नहीं है बल्कि युद्ध है. इराक़ में 30 जनवरी को होने वाले चुनावों को स्थगित करने की अपीलों के बावजूद अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने ज़ोर देकर कहा कि चुनाव निर्धारित समय पर ही होंगे. उन्होंने कहा, "हिंसा, आतंकवादियों और अपराधियों को राजनीतिक प्रक्रिया को रोकने और देश को तबाह करने का मौक़ा नहीं दिया जाएगा." चुनाव इराक़ के कई प्रमुख राजनीतिक दलों समेत राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे अदनान पचाची ने फिर चुनावों को स्थगित करने की मांग की है.
इराक़ी इस्लामिक पार्टी नाम की एक प्रमुख सुन्नी पार्टी ने इन चुनावों का बहिष्कार करने की घोषणा की है. इस बीच इराक़ी रक्षा मंत्री हाज़म शालन ने कहा है कि उन्होंने मिस्र से सुन्नी मुसलमानों से बात कर उनसे चुनावों में भाग लेने की अपील की है. अगर चुनाव निर्धारित समय पर होते है तो सवाल ये उठता है कि अगर उसके बाद विद्रोहियों ने अपने हमले नहीं रोके तो क्या होगा? इराक़ में अमरीकी सेना का विरोध कर रहे लोग ज़्यादातर सुन्नी मुसलमान और सद्दाम हुसैन के वफ़ादार हैं. माना ये जा रहा है कि चुनावों में जीत उन पार्टियों की ही होगी जो देश के बहुसंख्यक शिया मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करतीं हैं. गृह युद्ध ऐसी स्थिति में शिया और सुन्नी मुसलमानों में लड़ाई छिड़ सकती है जिसका नतीजा गृह युद्ध भी हो सकता है. इस ख़तरे का अंदाज़ा लगाते हुए शिया नेताओं ने सुन्नी मुसलमानों के प्रतिनिधियों को बातचीत का निमंत्रण दिया है.
चुनावों में अगर सुन्नी इलाक़ों में मतदान कम हुआ तो बात और बिगड़ सकती है. सुन्नी मुसलमान इस बात से नाराज़ हो सकते है कि उनका प्रतिनिधित्व सही ढंग से नहीं हो पाया है. इराक़ में विद्रोही कितने मज़बूत हो रहे हैं इसका अंदाज़ा बग़दाद के गवर्नर अली अल-हैदरी की हत्या से ही लगाया जा सकता है. साथ ही विद्रोही इराक़ी सुरक्षा बल को भी लगातार निशाना बना रहे हैं. हाल ही में अमरीकी सेना ने कहा था कि इराक़ में क़रीब 25 हज़ार लड़ाकू हैं. इसकी तुलना में इराक़ में मौजूद अमरीकी सैनिकों की संख्या ढेढ़ लाख है. इराक़ में बढ़ती हिंसा और प्रभावशाली तरिक़ों से किए गए हमलों को देखते हुए गठबंधन सेना में ब्रिटेन के प्रतिनिधी रहे सर जेरमी ग्रीनस्टॉक ने कहा था कि इराक़ में जारी विद्रोह को अब अमरीकी और विदेशी सैनिक भी नहीं ख़त्म कर सकते. उनका कहना था कि अब सब कुछ इराक़ियों पर ही निर्भर करता है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||