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महाविनाश के हथियारों की तलाश बंद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने कहा है कि उसने इराक़ में महाविनाश के हथियारों की तलाश का काम बंद कर दिया है. पत्रकारों को बताया गया है कि अमरीका के मुख्य हथियार निरीक्षक रिचर्ड डल्फ़र की अब इराक़ जाने की कोई योजना नहीं है. पिछले वर्ष ही डल्फ़र ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इराक़ में जैविक या रासायनिक हथियार मौजूद नहीं हैं और वे उस समय भी नहीं थे जब अमरीका ने इराक़ पर हमला बोला था. अमरीका और ब्रिटेन ने इराक़ पर हमला करने की सबसे बड़ी वजह महाविनाश के हथियारों की मौजूदगी ही बताई थी. अब ताज़ा घोषणा ऐसे समय में आई है जबकि इराक़ में इस महीने के अंत में चुनाव होने वाले हैं. अमरीकी अधिकारी अब भी दस्तावेज़ों के अंबार की छँटाई का काम कर रहे हैं और उनका कहना है कि अगर नए सुराग़ मिले तो जाँच होगी लेकिन मौजूदा तलाश रोकी जा रही है. व्हाइट हाऊस के प्रवक्ता स्कॉट मैकलेलेन का कहना है कि इसमें कोई नई बात नहीं है, उन्होंने कहा कि पिछले साल ही डल्फ़र की रिपोर्ट आने बाद ही राष्ट्रपति बुश ने स्पष्ट कर दिया था कि तलाश बंद कर दी जाएगी. इराक़ में महाविनाश के हथियारों के मुख्य जाँचकर्ता रहे डेविड के कहते हैं कि यह तो होना ही था, डेविड पहले ही अपनी रिपोर्ट में कह चुके थे कि इराक़ में महाविनाश के हथियार नहीं हैं. डेविड के ने बीबीसी के रेडियो फ़ोर को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा, "आप यक़ीन नहीं कर सकते कि लोगों को काम करने के लिए प्रेरित करना कितना मुश्किल काम था क्योंकि वे जानते थे कि उनकी व्यस्तता का कोई फ़ायदा नहीं है क्योंकि वहाँ हथियार ही नहीं हैं." इसी तरह संयुक्त राष्ट्र के मुख्य हथियार निरीक्षक हांस ब्लिक्स ने भी कहा कि उन्हें इस घोषणा पर कोई हैरत नहीं हुई है. ब्लिक्स का कहना है कि अमरीका को अब अपनी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र को सौंपनी चाहिए क्योंकि उन्होंने इस जाँच का काम संयुक्त राष्ट्र के हाथों से अपने हाथ में ले लिया था. |
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