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सूनामी की चेतावनी प्रणाली विकसित होगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनियाभर के नेताओं ने हिंद महासागर में सूनामी लहरों के बारे में पहले से चेतावनी देने वाली प्रणाली विकसित करने पर प्रतिबद्धता व्यक्त की है. दिसंबर में हिंद महासागर में आए सूनामी लहरों में एक लाख 40 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे और लाखों अभी भी लापता हैं. इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में राहत कार्यों पर हुए सम्मेलन के बाद एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए. सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र से ये अपील भी की गई कि वह राहत कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तैयार करें. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने सम्मेलन में अपील की कि आर्थिक मदद का वादा करने वाले देश अपना वादा पूरा करें. कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि राहत और पुनर्वास के काम को आगे बढ़ाने के लिए तत्काल एक अरब डॉलर की ज़रूरत है. कोफ़ी अन्नान ने यह बात सूनामी से पीड़ित लोगों तक सही तरीक़े से राहत पहुँचाने के बारे में विचार करने के लिए हो रहे सम्मेलन में कही है. उन्होंने कहा कि समय बहुत कम है और लोगों को बीमारी से बचाने के लिए ज़रूरी है कि तत्काल क़दम उठाए जाएँ. दुनिया भर से सूनामी पीड़ित देशों की मदद के लिए तीन अरब डॉलर के वादे किए जा चुके हैं लेकिन पहले भी ऐसा देखा गया है कि वादे पूरे नहीं हुए.
मिसाल के तौर पर ईरान में बाम में आए भूकंप के बाद एक अरब डॉलर की सहायता का वादा किया गया था लेकिन ईरान का कहना है कि उसे असल में सिर्फ़ 1.75 करोड़ डॉलर ही मिले. इसी सम्मेलन में अमरीका ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की कि वह तीन देशों के साथ मिलकर बनाए गए 'कोर ग्रुप' को भंग कर रहा है, अमरीका ने पहले घोषणा की थी कि जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया को साथ लेकर वह राहत के काम को आगे बढ़ाएगा. लेकिन अब अमरीका का कहना है कि 'कोर ग्रुप' का मक़सद पूरा हो गया है और अब इसकी कोई ज़रूरत नहीं है, ये देश अब संयुक्त राष्ट्र के साथ ही काम करेंगे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अलग समूह बनाकर काम करने से इस बात की आशंका थी कि राहत प्रयासों में दोहराव होगा और कुछ ज़रूरतमंद इलाक़े वंचित रह जाएँगे इसलिए यह फ़ैसला किया गया है. कर्ज़ से राहत इस सम्मेलन में सूनामी की चपेट में आकर तबाह हुए देशों को कर्ज़ से राहत देने के बारे में भी विचार विमर्श चल रहा है. कनाडा दुनिया का पहला देश है जिसने कर्ज़ से राहत की घोषणा भी कर दी है.
संभावना व्यक्त की जा रही है कि जल्दी ही कुछ यूरोपीय देश ऐसी ही घोषणा कर सकते हैं. ब्रिटेन के वित्त मंत्री गॉर्डन ब्राउन पहले ही कह चुके हैं कि वे कर्ज़ से अस्थायी राहत के बारे में सोच रहे हैं ताकि श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे देश किस्त देने में जाने वाली धनराशि को पुनर्वास के काम में लगा सकें. इसके अलावा जकार्ता सम्मेलन में सूनामी की चेतावनी देने वाली प्रणाली लगाने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है. जापान ने कहा है कि वह इस दिशा में मदद करने को तैयार है. कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि चेतावनी की प्रणाली को लगाना बहुत ज़रूरी है ताकि भविष्य में ऐसी आपदा आने की सूरत में नुक़सान को कम से कम किया जा सके. योजना इस सम्मेलन में बताया गया कि कुल 97.7 करोड़ डॉलर खर्च करके राहत-पुनर्वास योजना चलाई जाएगी जिसमें 21 करोड़ खाने पर, 22 करोड़ रहने की जगह बनाने पर और 12 करोड़ स्वास्थ्य सेवाओं पर लगाए जाएँगे. इस योजना के तहत सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए देश इंडोनेशिया को सबसे अधिक सहायता दी जाएगी, तत्काल सहायता के तौर पर इंडोनेशिया को 37 करोड़ डॉलर की सहायता मिलेगी. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि तत्काल एक अरब डॉलर की ज़रूरत है ताकि काम शुरू हो सके, उसके बाद बची रक़म कर्ज़, सेवाओं और उपकरणों के रूप में आ सकती है. |
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