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मूसल हमले की जाँच और कर्फ़्यू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के उत्तरी शहर मूसल में अमरीकी सेनाओं ने सभी ज़िलों की नाकेबंदी कर दी है और कर्फ़्यू लगा दिया है. साथ ही मंगलवार को अमरीकी सैनिक अड्डे पर हुए हमले की जाँच भी की जा रही है. इस हमले में 18 अमरीकी सैनिक और चार इराक़ी सैनिक मारे गए थे और 70 लोग घायल हुए थे. अभी यह पता नहीं चल सका है कि सैनिक अड्डे पर धमाका किसी आत्मघाती हमलावर से या फिर रॉकेट से हुआ था. इराक़ में अमरीकियों पर यह अब तक का सबसे बड़ा हमला था. अमरीकी सैन्य अधिकारियों ने कहा था कि मेरेज़ शिविर अड्डे के उस टेन्ट में विस्फोट हुआ जहाँ भोजन किया जाता है. एक वेबसाइट पर प्रकाशित किए गए एक बयान में कहा गया था कि यह हमला अंसार अल सुन्ना नाम के संगठन ने किया. बयान को भी इसी संगठन की तरफ़ से प्रकाशित बताया गया है. पहले सैन्य अधिकारियों ने कहा था कि कुछ अज्ञात हमलावरों ने स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1200 बजे रॉकेटों और मोर्टारों से हमला किया और हमले का निशाना संभवतः सैन्य अड्डे का भोजन कक्ष था. उत्तरी इराक़ में तैनात टास्क फ़ोर्स ओलंपिया के एक प्रवक्ता लैफ़्टिनेंट कर्नल पॉल हेस्टिंग्स ने कहा कि पूरी घटना की जाँच की जा रही है. उन्होंने कहा, "हम नहीं जानते कि यह कोई मोर्टार हमला था या फिर कोई बम विस्फोट." टास्क फ़ोर्स ओलंपिया के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल कार्टर हैम ने टेलीविज़न पर दिए एक बयान में कहा, "यह दरअसल बहुत ही दुख भरा दिन था." |
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