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कौन हैं केमिकल अली? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अली हसन अल-माजिद उन चंद लोगों में शामिल रहे हैं जिन पर सद्दाम हुसैन को बहुत भरोसा रहा है. उनका नाम सद्दाम हुसैन के प्रभावशाली जनरल के रूप में लिया जाता था. वह सद्दाम के चचेरे भाई भी हैं. यह कहा जाता रहा है कि सद्दाम हुसैन के निकट संबंधियों में अनेक को उनके बेटों उदै और क़ुसै ने अलग थलग कर दिया था लेकिन जनरल अल-माजिद फिर भी उनके चहेते बने रहने में कामयाब रहे. जनरल माजिद ने दोनों भाइयों उदै और कुसै के बीच के मतभेदों और दुश्मनी को दूर करने के लिए भी कामयाब बीच-बचाव किया था. जनरल अल-माजिद के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने उत्तरी इलाक़े में कुर्दों को प्रताड़ित किया और हलाब्जा गाँव में एक रसायनिक गैस का इस्तेमाल करके क़रीब पाँच हज़ार कुर्दों को मारा था. इसी आरोप के चलते उन्हें केमिकल अली के नाम से जाना जाता है. कहा यह भी जाता है कि जनरल अल-माजिद ने 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान दक्षिणी इराक़ में शिया समुदाय में पैदा हुए असंतोष को दबाने के लिए भी बल प्रयोग किया था. आरोप ये भी लगाए जाते रहे हैं कि जनरल अल-माजिद ने अनेक शिया विरोधियों को सरेआम फाँसी पर लटकवा दिया था और कुछ मौलवियों के शव क़ब्रों से भी निकलवा दिए थे. 1990 में जब इराक़ ने कुवैत पर हमला किया था तब जनरल अल-माजिद ने कुछ दिन के लिए कुवैत के गवर्नर के रूप में भी काम किया था. वहाँ भी उन पर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाए गए थे. अमरीका और ब्रिटेन के मौजूदा हमले के हालात में सद्दाम हुसैन ने जनरल अल-माजिद को दक्षिणी इराक़ का प्रभारी बनाया था. तब आशंका व्यक्त की गई थी कि जनरल अल-माजिद अमरीकी और ब्रितानी सेनाओं के ख़िलाफ़ दक्षिणी इलाक़े में घुसते ही रसायनिक और जैविक हथियार इस्तेमाल कर सकते थे. |
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