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बम धमाकों के सिलसिले में कई गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में सुरक्षा सेवाओं का कहना है कि उन्होंने रविवार को शिया बहुल शहरों - नजफ़ और करबला में हुए आत्मघाती कार बम धमाकों के सिलसिले में 50 लोगों हिरासत में लिया है. एक प्रांतीय गवर्नर अदनान अल-ज़ुर्फ़ी का कहना था कि एक संदिग्ध व्यक्ति के पास विदेशी देश का पासपोर्ट मिला है. माना जा रहा है कि संदिग्ध सुन्नी चरमपंथियों ने ये हमले किए थे जिनमें 60 लोगों की मौत हो गई और 150 से ज़्यादा लोग घायल हो गए. उधर शिया धार्मिक नेताओं ने सुन्नी चरमपंथियों पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है. इस साल जुलाई के बाद इराक़ में किसी एक दिन की हिंसक घटनाओं में मारे जाने वालों की ये सबसे अधिक संख्या थी. शिया धार्मिक नेताओं शिया समुदाय के लोगों को संयम बरतने को कहा है. शिया-सुन्नी विवाद एक प्रमुख शिया नेता आयतुल्ला मोहम्मद सईद अल-हाकिम का कहना था कि अगले महीने होने वाले चुनावों से पहले इन हमलों के ज़रिए शिया और सुन्नी समुदायों के बीच झड़पें करवाने की कोशिश की गई है.
एक अन्य शिया मौलवी मोहम्मद बहर अल-उलूम का कहना था कि इराक़ में शिया लोग अगले महीने होने वाले चुनाव में शांतिपूर्ण ढ़ंग से भाग लेने के लिए प्रतिबद्ध हैं. शिया नेताओं ने चेतावनी दी है कि इन हमलों के बाद बदले की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. इराक़ की 60 प्रतिशत जनसंख्या शिया है लेकिन पिछले कई दशकों से वहाँ सत्ता सुन्नी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के हाथ में रही है. चुनाव कर्मचारियों की हत्या रविवार को ही राजधानी बग़दाद में चुनाव आयोग से संबंधित तीन कर्मचारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. उधर चुनाव आयोग के प्रवक्ता फ़रीद आयार ने बीबीसी को बताया कि चाहे जितनी भी हिंसक गतिविधियाँ की जाएँ लेकिन चुनाव सुनिश्चित समय पर होने से टालने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी. लेकिन उनका ये भी कहना था कि देश में सुरक्षा स्थिति बेहतर करने और चुनाव की तैयारी में जुटे कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कदम उठाए जाएँगे. |
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