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इराक़ में चुनाव प्रचार शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में छह हफ़्ते बाद होने वाले चुनाव के लिए बुधवार से आधिकारिक तौर पर चुनाव प्रचार शुरु हो गया है. चुनाव 30 जनवरी को कराए जाने हैं. मतदाता 275 सदस्यों वाली एसेंबली को चुनेंगे जो नई सरकार का गठन करेगी और नया संविधान बनाएगी. बग़दाद में चुनाव अधिकारियों का कहना है कि लगभग 80 राजनीतिक दलों ने चुनाव में भाग लेने के लिए अपने नाम दर्ज करवाए हैं. इन पार्टियों में सुन्नी मुसलमानों के वे गुट भी हैं जिन्होंने पहले चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दी थी. इन दलों का कहना था कि ज़्यादातर हिंसा सुन्नी बहुल इलाकों में हो रही है और ऐसे माहौल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाना संभव नहीं होगा. बीबीसी संवाददाता पीटर ग्रेस्टे के अनुसार जिन इलाकों में सशस्त्र विद्रोह जारी है वहाँ चुनाव करवाना बड़ी चुनौति होगी. उधर शियाओं के एक नेता और इराक़ के विदेश उपमंत्री हमीद अल बयाती का कहना है कि चुनाव टालना ठीक नहीं होगा. उनका कहना था,"हमारे सामने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ समस्याएँ हैं लेकिन चुनावों को आगे टालना उचित नहीं होगा. क्योंकि अगर चुनाव की तारीख़ आगे बढ़ाई जाती है तो आरोप लगेंगे कि हम लोकतंत्र की स्थापना और चुनाव कराने के वादे से पीछे हट रहे हैं. ये आदर्श चुनाव तो नहीं लेकिन उम्मीद है कि ये निष्पक्ष होंगे." बीबीसी संवाददाता के अनुसार यदि चुनाव विफल होते हैं तो शिया, कुर्दों और सुन्नियों के बीच खाई की ओर इशारा करेंगे और सरकार के पास शासन करने का नैतिक आधार नहीं होगा. लेकिन अगर चुनाव सफल होते हैं तो अमरीकी राष्ट्रपति बुश का लोकतंत्र का वादा पूरा हो जाएगा. इराक़ के अंतरिम राष्ट्रपति ग़ाज़ी अल यावर ने भी कहा है कि देश में चुनाव निर्धारित समय पर कराए जाएँगे. |
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