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गुरुवार, 11 नवंबर, 2004 को 08:47 GMT तक के समाचार
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अराफ़ात की मौत पर प्रतिक्रिया
यासिर अराफ़ात
चालीस साल तक फ़लस्तीनी संघर्ष किया
फ़लस्तीनी संघर्ष के प्रतीक और फ़लस्तीनियों के उद्धारक माने जाने वाले यासिर अराफ़ात का 75 साल की अवस्था में गुरूवार 11 नवंबर को तड़के पेरिस के एक अस्पताल में निधन हो गया.

दुनिया के कुछ नेताओं ने अराफ़ात को एक राजनेता बताया तो इसराइल ने उन्हें "एक आतंकवादी नेता" क़रार दिया.

फ़लस्तीन के मुख्य वार्ताकार और वरिष्ठ नेता साएब एराकात ने अराफ़ात की मौत के दिन "फ़लस्तीनी इतिहास में काला दिन" बताया.

अराफ़ात की मौत की ख़बर से फ़लस्तीनी क्षेत्रों में मातम छा गया है.

इसराइल के एक मंत्री ने अराफ़ात को "इसराइल के ख़िलाफ़ आतंकवाद का नेता" कहकर पुकारा.

इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के एक वरिष्ठ सलाहकार ज़लमान शोवाल ने अराफ़ात को "एक ऐसा व्यक्ति बताया जिसने निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ आतंकवाद को अपना मुख्य राजनीतिक हथियार बनाया."

इसराइल ने पश्चिमी तट में एहतियात के तौर पर अपनी सीमाएँ सील कर दी हैं और यहूदी बस्तियों में भी सुरक्षा मज़बूत कर दी है.

संयुक्त राष्ट्र

फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात की याद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मौन रखा. महासचिव कोफ़ी अन्नान ने उन्हें याद दिलाया कि इसी हफ़्ते, तीस साल पहले, यासिर अराफ़ात ने महासभा को संबोधित किया था.

ऐसा करने वाले वे किसी ग़ैर सरकारी संगठन के पहले प्रतिनिधि थे. पूरी महासभा अराफ़ात से मिलने जीनिवा तक गई थी क्योंकि उन्हें अमरीका का वीसा नहीं दिया गया था.

कोफ़ी अन्नान ने कहा कि अराफ़ात दुनिया के उन कुछ ही नेताओं में से हैं जिन्हें लोग तुरंत पहचान लेते हैं.

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अराफ़ात फ़लस्तीनी राज्य और इसराइल के शांतिपूर्ण सह-असतित्व का सपना पूरा होते नहीं देख सके.

उन्होंने कहा कि अतंरराष्ट्रीय समुदाय को अब फ़लस्तीनियों की मदद के लिए और अधिक प्रयास करना चाहिए. अन्नान ने आशा जताई कि अराफ़ात का निधन शायद फ़लस्तीनियों को शांति वार्ता शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करे.

विश्व नेता

व्हाइट हाउस ने अराफ़ात की मौत को सिर्फ़ "फ़लस्तीनी इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण" बताया और अपना शोक व्यक्त किया.

फ्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक़ ने अराफ़ात को एक ऐसा साहसिक नेता बताया जिसने चालीस साल तक फ़लस्तीनी अधिकारों की लड़ाई को पहचान दिलाई."

ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि अब मध्य पूर्व में शांति स्थापना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि अराफ़ात की मौत फ़लस्तीनियों के लिए भारी नुक़सान है.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने कहा कि वह सोचते हैं कि इसराइल ने सन 2000 में उन्हें जो कुछ पेश किया था उसे स्वीकार नहीं करने के लिए इतिहास उनके साथ बेरहमी से पेश आएगा.

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कहा कि फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वो था जब उन्होंने इसराइल के साथ 1993 में ओस्लो शांति समझौते पर दस्तख़त किए थे.

जानकारों का मानना हैं कि अराफ़ात की मौत से मध्य पूर्व की इस समस्या को सुलझाने का कोई नया रास्ता खुल सकता हैं.

बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के संवाददाता पॉल रेनॉल्ड्स के अनुसार इसराइल के पास शांति की ओर बढ़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा क्योंकि वह लगातार कहता रहा है कि शांति के रास्ते में अराफ़ात सबसे बड़ा रोड़ा हैं.

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