| कौन हैं सुहा अराफ़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुनहरे बाल, फ़र्राटेदार अंग्रेज़ी और डिजाइनर सूट में लिपटी सुहा अराफ़ात का यासिर अराफ़ात की पत्नी होना कौतूहल पैदा करता है. अराफ़ात जहाँ लंबे संघर्ष के प्रतीक है वहीं सुहा को देखकर ऐसा कोई आभास नहीं होता. अराफ़ात की गंभीर बीमारी के दौरान सुहा विवादों के घेरें में आ गई. कहा जा रहा था कि वो पेरिस के एक अस्पताल में भर्ती अराफ़ात से किसी को मिलने नहीं दे रही थीं. इससे पहले सुहा ने यह बयान देकर सबको चौंका दिया था कि अराफ़ात के सहयोगी उनके ख़िलाफ़ षडयंत्र कर रहे हैं और अराफ़ात को "ज़िदा दफ़न" कर देना चाहते हैं. सुहा ने यासिर अराफ़ात से ट्यूनिश में क़रीब एक दशक पहले गुपचुप तरीक़े से शादी की थी. शादी के बाद सुहा ने कभी भी कूटनीतिक मामलों में दिलचस्पी नहीं ली लेकिन यदा कदा उनके चौंकाने वाले बयान आते रहे. सन् 2002 में जब अराफ़ात ने "नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकवादी हमलों" की निंदा की तो सुहा ने आत्मघाती हमलों का समर्थन किया. लंदन से छपने वाले एक अरबी अख़बार को दिए बयान में सुहा ने कहा कि अगर उनका कोई बेटा होता तो फ़लस्तीनी संघर्ष के लिए वह अपने बच्चे की बलि चढ़ा देतीं क्योंकि इससे बड़ा सम्मान कोई और नहीं. क़रीब एक साल पहले एक इंटरव्यू में सुहा ने कहा था, "मैं इसराइलियों से घृणा करती हूँ. हमारे बच्चों को हो रही समस्याओं के लिए इसराइली ज़िम्मेदार है. मैं इसराइल के साथ संबंध सामान्य करने का विरोध करती हूँ." 1999 में अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन से मुलाक़ात के दौरान सुहा ने इसराइल पर फ़लस्तीन की हवाओं और पानी में ज़हर घोलने और कैंसर फैलाने का आरोप लगाया था. जवाब में हिलेरी ने कहा कि सुहा ऐसे बयान देती हैं जिसका असर मध्य पूर्व की शांति प्रक्रिया पर पड़ सकता है. निर्वासित जीवन रमल्ला और नाबलूस के एक कैथोलिक परिवार में पली-बढ़ीं सुहा अराफ़ात पढ़ने के लिए पेरिस गई थीं. सुहा के पिता बैंकर थे और माँ रीमोंडा तवील जाना मानी फ़लस्तीनी पत्रकार. सुहा अपनी माँ के ज़ए ही सबसे पहले यासिर अराफ़ात से मिली थीं. मुलाक़ात के बाद सुहा, अराफ़ात के साथ पीएलओ में काम करने ट्यूनिश चलीं गईं. उस दौरान पीएलओ निर्वासन में काम करता था. बाद में सुहा ने इस्लाम धर्म अपनाया और 1990 में यासिर अराफ़ात से उनकी शादी हुई. सुहा की उम्र 25 से कुछ अधिक थी और यासिर 60 के हो चुके थे. कुछ रिपोर्टो के अनुसार जब अराफ़ात फ़लस्तीन लौटे तो दोनों अलग-अलग जीवन बिताने लगे थे. एक रिपोर्ट के अनुसार सुहा के घर में पोप, ईसा मसीह और जवानी के दिनों में बंदूक थामे अराफ़ात की तस्वीरें लगी होती थीं.
अराफ़ात दंपत्ति की पहली और एकमात्र संतान एक बेटी ज्वाहा 1995 में पैदा हुई. दूसरे इंतिफादा की शुरुआत के बाद सुहा पेरिस चली गईं जहाँ वह अपनी माँ के साथ रहने लगीं. विवाद चाहे अराफ़ात और सुहा अलग अलग रह रहे हों, विवादों ने सुहा का साथ नहीं छोड़ा. फ्रांस के अधिकारियों ने हाल ही में जानकारी दी थी कि सुहा के बैंक खातों की जाँच चल रही है जिनमें विदेशी बैंक खातों से भारी पैमाने पर धन आया है. इस ख़बर से उन अफवाहों को भी बल मिला कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है. जवाब में सुहा ने इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन पर फ्रांसीसी जाँच संबंधी ख़बर लीक करने का आरोप लगाया. सुहा का कहना था कि ये ख़बर फैलाकर शेरॉन अपने ख़िलाफ़ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों से ध्यान हटा रहे थे. सुहा ने अराफ़ात के निकटतम सहयोगियों पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि हर सुंदर फूल के चारों ओर काँटे आ ही जाते हैं. फ़लस्तीनी प्राधिकरण या फ़लस्तीनी जनता में सुहा की कोई पैठ नहीं रही है और अराफ़ात के निधन के बाद अब उनके पास बस नाम ही रह जाए. |
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