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फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात का निधन
यासिर अराफ़ात
यासिर अराफ़ात के बाद फ़लस्तीन में नेतृत्व को लेकर विवाद हो सकता है
फ़लस्तीनी आंदोलन के प्रतीक और फ़लस्तीनियों के उद्धारक माने जाने वाले यासिर अराफ़ात का 75 साल की अवस्था में गुरूवार 11 नवंबर को तड़के पेरिस के एक अस्पताल में निधन हो गया.

फ़लस्तीनी प्रशासन के मुख्य वार्ताकार और वरिष्ठ नेता साएब एराकात ने अराफ़ात की मौत के दिन को "फ़लस्तीनी इतिहास में काला दिन" बताया.

अराफ़ात की मौत की ख़बर से फ़लस्तीनी क्षेत्रों में मातम छा गया.

ज़्यादातर नेताओं ने यासिर अराफ़ात को एक राजनेता क़रार दिया जबकि इसराइल के एक मंत्री ने अराफ़ात को "इसराइल के ख़िलाफ़ आतंकवाद का नेता" कहकर पुकारा.

वह पिछले क़रीब एक सप्ताह से गंभीर रूप से बीमार थे और इलाज के लिए उन्हें पेरिस के एक सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहाँ डॉक्टर लगातार उनकी सघन चिकित्सा कर रहे थे.

पिछले कुछ दिनों में उनकी हालत बहुत बिगड़ गई थी और उन्हें मशीनों के सहारे ज़िंदा रखा गया था.

फ़लस्तीनी नेताओं ने ग़ज़ा पट्टी में सत्ता के संभावित संघर्ष को रोकने के लिए एक योजना बना ली हैं.

जानकारों का मानना हैं कि अराफ़ात की मौत से मध्य पूर्व की इस समस्या को सुलझाने का कोई नया रास्ता खुल सकता हैं.

बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के संवाददाता पॉल रेनॉल्ड्स के अनुसार इसराइल के पास शांति की ओर बढ़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा क्योंकि वह लगातार कहता रहा है कि शांति के रास्ते में अराफ़ात सबसे बड़ा रोड़ा हैं.

बेहोशी की हालत

अराफ़ात तीन नवंबर से ही बेहोशी की हालत में थे और बाद में उनके दिमाग़ की नसें फट गई थीं.

यासिर अराफ़ात
एक युग का अंत

अस्पताल के प्रवक्ता ने बताया कि अराफ़ात का निधन गुरुवार को ग्रीनिच मानक समय के अनुसार तड़के 02.30 पर हुआ. भारतीय समय के अनुसार सुबह के क़रीब साढ़े आठ बजे.

हालाँकि बुधवार से ही मिश्र की राजधानी काहिरा में अराफ़ात के जनाज़े की तैयारियाँ की जा रही थीं. कहा जा रहा है कि काहिरा में शुक्रवार को शोक सभा आयोजित की जा सकती हैं.

फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अराफात के सम्मान में समारोह आयोजित करने का मिस्र प्रस्ताव मान लिया हैं. अराफ़ात को रमल्ला शहर में ही दफ़नाया जाएगा.

राष्ट्रीय समारोह

बुधवार की देर रात फ़लस्तीनी विदेश मंत्री नबील शाद ने कहा था कि अराफ़ात का दिल और गुर्दे काम कर रहे हैं.

अराफ़ात के क़रीबी सहयोगी नबील अबू रदेने बुधवार को काहिरा पहुँचे जहाँ वह शोक समारोह की तैयारी में जुटे हैं.

काहिरा हवाई अड्डे पर उन्होंने कहा था, "अगर अगले कुछ घंटों में अराफ़ात का निधन हो जाता हैं, जैसा कि डाक्टरों का कहना है तो काहिरा में शुक्रवार को आधिकारिक शोक समारोह किया जाएगा जिसमें अरब और इस्लामी देशों के प्रमुख हिस्सा लेंगे."

अराफ़ात का शोक समारोह ग़ज़ा या पश्चिमी तट में नहीं करने का फैसला इसलिए किया गया ताकि अरब देशों के प्रमुख ग़ज़ा और वेस्ट बैंक जाने की दिक्क़तों से बच सकें. लेकिन अभी यह स्पष्ट नही है कि कौन-कौन से नेता इसमें शामिल होंगे.

अरब देशों के कई नेता अराफ़ात को चाहते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो उन्हें पसंद नहीं करते थे.

इसराइल ने यासिर अराफ़ात को रमल्ला में दफ़न करने की अनुमति दे दी हैं. पिछले सप्ताह इसराइल ने कहा था कि अराफ़ात को रमल्ला में दफ़नाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

रमल्ला के उसी परिसर में अराफ़ात को ज़मीन नसीब होगी जहाँ उन्हें पिछले कुछ वर्षों से नज़रबंद रखा गया. बुलडोज़र की मदद से इस परिसर में क़ब्र खोदी जा रही हैं.

शांति का रास्ता

अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने कहा है कि फ़लस्तीनी प्रशासन के नए नेतृत्व के साथ शांति वार्ताओं की फिर से शुरुआत हो सकती है.

उन्होंने कहा, "अगर फ़लस्तीनी लोग आगे आकर कहें कि वो एक लोकतांत्रिक और खुले समाज की स्थापना करना चाहते हैं और इसमें उन्हें मदद चाहिए तो फ़लस्तीनियों के नए नेतृत्व से शांति वार्ता का रास्ता खुल सकता है."

बुश का कहना था कि अगर लोग आगे आएंगे तो अमरीका को उनकी मदद करने में कोई आपत्ति नहीं होगी.

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