| रिश्वत के दावे अकल्पनीय हैं:कोफ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने इन दावों को ख़ारिज कर दिया है कि फ्रांस, चीन और रूस रिश्वत और तेल के ठेकों के बदले इराक़ पर से प्रतिबंधों में ढील देने के लिए तैयार हो गए थे. एक ब्रितानी टेलीविज़न चैनल को शनिवार को दिए इंटरव्यू में कोफ़ी अन्नान ने कहा कि ऐसा कल्पना के भी बाहर की बात है. कोफ़ी अन्नान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ के लिए 'तेल के बदले खाद्य कार्यक्रम' 1990 में चलाया था. "ऐसा इसलिए किया गया था ताकि इराक़ तेल की बिक्री से होने वाली आमदनी से ज़रूरी सामान ख़रीद सके और कुवैत पर हमला करने के बाद उस पर जो प्रतिबंध लगे थे, उनका उल्लंघन भी ना हो." लेकिन तेल के बदले खाद्य कार्यक्रम में अब भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं. इराक़ में महाविनाश के हथियारों की खोज करने वाले एक अमरीकी दल ने इस महीने के आरंभ में कहा था कि सद्दाम हुसैन ने तेल के बदले खाद्य कार्यक्रम का दुरुपयोग करते हुए सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्यों का भरोसा जीतने की कोशिश की थी ताकि इराक़ पर से प्रतिबंध हटाए जा सकें. कोफ़ी अन्नान ने अब कहा है कि इस तरह की बातें कल्पना के बाहर हैं. अमरीकी सेंट्रल बैंक के एक पूर्व चेयरमैन इन आरोपों की जाँच कर रहे हैं कि क्या सद्दाम हुसैन ने प्रतिबंध हटाने के लिए कुछ देशों को रिश्वत या तेल के ठेकों का लालच दिया था? और संयुक्त राष्ट्र ने इस जाँच के लिए तेल के बदले खाद्य कार्यक्रम में से क़रीब तीन करोड़ डॉलर की रक़म निर्धारित कर दी है. |
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