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इराक़ के लिए धन की माँग की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के अंतरिम उप प्रधानमंत्री बरहम सालेह ने देश के पुनर्निर्माण का वादा करने वाले देशों से कहा है कि वे अब बिना किसी देर के धन जारी करें. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को इसी तरह थामा जा सकता है और इराक़ियों का दीर्घकालिक भविष्य भी इसी से बनेगा. जापान की राजधानी टोक्यो में बुधवार को इकट्ठा हुए 50 से भी अधिक देशों की एक बैठक में उन्होंने ये माँग रखी. इस सम्मेलन में विचार इस बात पर नहीं हो रहा है कि इराक़ को और ज़्यादा आर्थिक मदद कैसे मिले क्योंकि इराक़ के पुनर्निर्माण के लिए पहले ही काफ़ी धन देने का वादा किया जा चुका है. दरअसल समस्या ये है कि इस धन को इराक़ में उन क्षेत्रों में कैसे पहुँचाया जाए, जहाँ इसकी ज़रूरत है. स्पेन की राजधानी मैड्रिड में पिछले साल इसी तरह की एक बैठक में इराक़ को 14 अरब डॉलर देने का विश्वास दिलाया गया था. फिर अमरीका ने 18 अरब डॉलर लगाने की बात कही थी. मगर जो धन देने का वादा किया गया था, इराक़ में लगातार जारी हिंसा और अपहरणों की वजह से उसमें से कुछ करोड़ डॉलर ही अब तक ख़र्च हुए हैं. भविष्य के लिए टोक्यो सम्मेलन में 55 देशों और संगठनों की बैठक को संबोधित करते हुए इराक़ के उप प्रधानमंत्री बरहम सालेह ने कहा कि इराक़ में जो धन लगाया जाएगा वो सिर्फ़ इराक़ के लिए नहीं होकर पूरे क्षेत्र के भविष्य के लिए होगा. उन्होंने इस मौक़े पर संयुक्त राष्ट्र को भी उसकी प्रतिबद्धताओं की याद दिलाते हुए कहा, "मैं संयुक्त राष्ट्र से पूछता हूँ कि उसे जो राजनीतिक प्रक्रिया के लिए महत्त्वपूर्ण समर्थन दिलाना है वो कहाँ है." "संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव संख्या 1546 के तहत जो प्रतिबद्धताएँ की गई थीं वो कहाँ हैं. हमें संयुक्त राष्ट्र से और मदद की ज़रूरत है और वो ज़रूरत बिल्कुल अभी है. कृपया इराक़ के लोगों को निराश मत कीजिए." अमरीका ने 18 अरब डॉलर की जिस रक़म का वादा किया था उसमें से अभी तक सिर्फ़ एक अरब डॉलर ही दिए गए हैं. इसके अलावा पानी और बिजली की आपूर्ति ठीक करने के लिए तीन अरब डॉलर से भी अधिक का जो धन निर्धारित किया गया था वो सुरक्षा सुधारने, रोज़ग़ार के अवसर पैदा करने और तेल का उत्पादन बढ़ाने पर ख़र्च हो चुका है.
ब्रिटेन ने भी लगभग 50 करोड़ डॉलर और यूरोपीय संघ ने लगभग 24 करोड़ डॉलर देने का वादा किया था. इराक़ की अंतरिम सरकार ने कहा है कि धन देने का वादा करने वाले देशों को 324 परियोजनाओं की एक सूची सौंपी जाएगी जिनके लिए लगभग 44 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी. जबकि पिछले साल संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अनुमान लगाया था कि वर्ष 2004 से 2007 तक इराक़ को 36 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी मगर विश्व बैंक का कहना है कि इसमें सुरक्षा और तेल के लिए 20 अरब डॉलर की और ज़रूरत होगी. उधर अमरीका के विदेश उपमंत्री रिचर्ड आर्मिटेज ने अन्य देशों से अपील की है कि सद्दाम हुसैन की सरकार ने जो 125 अरब डॉलर के क़र्ज़ लिए थे वे माफ़ कर दिए जाएँ जिससे देश के सामने मौजूद कई समस्याओं में से कम से कम एक राह तो आसान हो जाए. |
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