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'महाविनाश के हथियारों के सबूत नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में महाविनाश के हथियारों पर अपनी रिपोर्ट में इराक़ सर्वे ग्रुप ने कहा है कि इराक़ में सैनिक कार्रवाई से पहले वहाँ ऐसे हथियारों के कोई सबूत नहीं मिले हैं. पिछले साल इराक़ सर्वे ग्रुप को इराक़ में महाविनाश के हथियार कार्यक्रम की जाँच का काम सौंपा गया था. इराक सर्वे ग्रुप (आईएसजी) के प्रमुख चार्ल्स डेल्फ़र ने एक सीनेट समिति को बताया कि पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन हथियार कार्यक्रम शुरू करना चाहते थे. लेकिन 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद इराक़ की परमाणु क्षमता आगे बढ़ी नहीं बल्कि नष्ट होने लगी. अमरीका ने इराक़ पर हमले के लिए जो कारण गिनाए थे उनमें इराक़ के पास महाविनाश के हथियार प्रमुख कारण था. लेकिन अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एक बार फिर इराक़ पर हमले के फ़ैसले को सही बताया है जबकि ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का कहना है कि रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सद्दाम हुसैन महाविनाश के हथियार विकसित करना चाहते थे. रिपोर्ट आईएसजी ने अपनी रिपोर्ट में सद्दाम हुसैन के हथियार कार्यक्रम की व्यापक जाँच-पड़ताल की.
इसके लिए ग्रुप से जुड़े अधिकारियों ने सद्दाम हुसैन सहित उनके शासनकाल के वरिष्ठ अधिकारियों से भी सूचनाएँ जुटाईं. डेल्फ़र ने सीनेट कमेटी को बताया कि उनकी टीम को इराक़ में जैविक, रसायनिक और परमाणु हथियार नहीं मिले. उन्होंने कहा कि वे नहीं मानते कि ऐसे हथियार छिपाए गए हैं. डेल्फ़र ने कहा कि 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद ऐसे हथियार नष्ट कर दिए गए. क्योंकि सद्दाम चाहते थे कि इराक़ पर लगे संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध ख़त्म कर दिए जाए. डेल्फ़र ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टीम को ऐसे सबूत भी मिले कि सद्दाम हुसैन हथियार कार्यक्रम को शुरू करना चाहते थे. दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एक बार फिर इराक़ पर हमला करने के अपने फ़ैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि इस बात का ख़तरा बना हुआ था कि सद्दाम हुसैन के पास से महाविनाश के हथियार आतंकवादी गुटों के हाथ में पहुँच सकते हैं और यह एक ऐसा ख़तरा था जिसे अमरीका लेना नहीं चाहता था. इराक़ सर्वे ग्रुप की रिपोर्ट के बारे में पहले से ही अटकलें लगाई जा रही थी. इस साल जनवरी में ग्रुप के पूर्व प्रमुख डेविड के ने इस्तीफ़ा दे दिया था और पिछले महीने इस रिपोर्ट की एक कॉपी लीक भी हो गई थी. बीबीसी के पेंटागन संवाददाता निक चाइल्ड्स का कहना है कि एक हज़ार से भी ज़्यादा पन्ने की इस रिपोर्ट में इराक़ के हथियार कार्यक्रम का व्यापक लेखा-जोखा है. प्रतिक्रिया पेन्सिलवेनिया में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए बुश ने कहा कि 11 सितंबर के हमले के बाद अमरीका को महाविनाश के हथियारों के स्रोत को ढूँढ़ना था जो आतंकवादियों के हाथ लग सकता था.
बुश ने कहा, "हमें ऐसे सभी स्थानों की ओर देखना था जहाँ से ऐसे हथियार आतंकवादियों के हाथ लग सकते थे. इनमें से एक था सद्दाम हुसैन का निरंकुश शासन." उधर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे साबित होता है कि सद्दाम हुसैन ने महाविनाश के हथियार विकसित करने की योजना बनाई थी. ब्लेयर ने कहा, "मैं इस रिपोर्ट का स्वागत करता हूँ. इस रिपोर्ट से यह पता चलता है कि यह इतनी आसान स्थिति नहीं थी जितना लोग समझ रहे थे. रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट है कि सद्दाम ने अपनी ओर से ऐसे हथियार विकसित करने की हरसंभव कोशिश की थी और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन भी किया." इराक़ के उप प्रधानमंत्री बरहेम सालेह ने भी कहा है कि जिस किसी को इस बात पर संदेह है कि सद्दाम हुसैन के पास महाविनाश के हथियार नहीं थे, उसे हलाब्जा का दौरा करने की ज़रूरत है जहाँ सद्दाम हुसैन ने हज़ारों कुर्दों पर रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि सद्दाम हुसैन के पास महाविनाश के हथियार थे और उन्होंने इसका इस्तेमाल भी किया." सालेह ने कहा कि उनके विचार में सद्दाम हुसैन ख़ुद महाविनाश के हथियार थे. पेंटागन स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव इतने क़रीब है इस कारण रिपब्लिकन और डेमोक्रेट इस रिपोर्ट की अपनी तरह से व्याख्या करेंगे और इराक़ पर अपने रुख़ को सही ठहराने की कोशिश करेंगे. |
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