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परमाणु ठिकानों की सुरक्षा का विवाद बढ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के पूर्व मुख्य हथियार निरीक्षक हांस ब्लिक्स ने इराक़ के परमाणु ठिकानों से संवेदनशील सामग्री ग़ायब किए जाने के मुद्दे पर अमरीका की आलोचना की है. बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में ब्लिक्स ने कहा है कि ये शर्म की बात है कि जो हमला महाविनाश के हथियारों पर नियंत्रण के लिए किया गया था, उसी हमले के बाद अमरीका ने ऐसे उपकरणों को ग़ायब होने दिया जिनसे परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं. ब्लिक्स ने कहा है, '' इन सभी उपकरणों पर निशान लगाया जा चुका था और तब इराक़ पर दो लाख सैनिकों के साथ अमरीका ने क़ब्ज़ा किया. ऐसी स्थिति में ऐसे उपकरण ग़ायब हो गए जो परमाणु हथियार बनाने में काम आ सकते हैं.'' ब्लिक्स ने ये भी स्पष्ट किया है कि केवल इन उपकरणों की मदद से परमाणु हथियार तो नहीं बन सकते लेकिन ये हथियार बनाने में सहायक ज़रूर हो सकते हैं. अमरीका ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की चिंता को तो माना है लेकिन यह भी कहा है कि युद्ध के बाद एजेंसी को दो बार वहाँ निरीक्षण करने की इजाज़त दी गई थी. अमरीकी अधिकारी मानते हैं कि अमरीकी क़ब्ज़े के बाद इराक़ में जमकर लूटपाट हुई. उनका कहना है कि सामानों की लूटपाट हुई और उन्हें इराक़ से बाहर भी पहुंचाया गया और ये भी संभव है कि इन सामानों में कई ऐसे उपकरण भी हों जो संवेदनशील हों. उनका कहना है कि उसके बाद से उन्होंने इराक़ी अधिकारियों के साथ मिलकर हथियार बनाने की तकनीक के प्रसार को रोकने के लिए काम किया है. 'चिंता बेमतलब' उधर इराक़ की अंतरिम सरकार ने देश के परमाणु ठिकानों से संवेदनशील सामग्री ग़ायब किए जाने के बारे में संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी की चिंता को ख़ारिज कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद अलबारादेई ने अपनी छमाही रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की है कि इराक़ के परमाणु केंद्र से ऐसी तकनीक, उपकरण और सामग्रियाँ ग़ायब हैं जिनका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है. इराक़ की अंतरिम सरकार के तकनीकी मंत्री राशिद उमर ने बीबीसी से बातचीत में स्वीकार किया कि देश पर अमरीकी हमले के तुरंत बाद लुटेरों ने कुछ उपकरण लूट लिए थे, लेकिन उसके बाद मुख्य परमाणु केंद्र तुवैथा और अन्य परमाणु ठिकानों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. उमर ने कहा कि इराक़ अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करेगा. दावा वापस लिया
इस बीच ब्रिटेन की सरकार ने इराक़ पर हमले से पहले दी गई उस दलील को औपचारिक रूप से वापस ले लिया है कि इराक़ 45 मिनट के भीतर रासायनिक और जैविक हथियार तैनात कर सकता है. ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने संसद में एक बहस में भाग लेते हुए कहा कि देश की ख़ुफ़िया संस्थाओं ने मान लिया है कि 45 मिनट वाले दावे के समर्थन में उनके पास सबूत नहीं हैं. हालाँकि स्ट्रॉ ने इराक़ पर हमले के लिए माफ़ी माँगने की विपक्ष की माँग को अस्वीकार कर दिया. उन्होंने कहा कि कुछ ख़ुफ़िया सूचनाएँ भले ही ग़लत साबित हुई हों, सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने का फ़ैसला बिल्कुल सही था. |
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