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बुश और केरी के बीच हुई सीधी बहस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच टेलीविज़न पर सीधी बहस हुई है. रिपब्लिकन उम्मीदवार और मौजूदा राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जॉन केरी ने सीधी बहस में देश की सुरक्षा और विदेश नीति पर अपने-अपने तर्क रखे हैं. चुनाव दो नवंबर को होना है. बहस मुख्य रूप से इसी मुद्दे पर हुई कि इराक़ पर हमला करना क्या सही था और दोनों में से कौन उम्मीदवार राष्ट्रपति बनने के बाद अमरीका को ज़्यादा सुरक्षित बनाएगा? यह बहस फ्लोरिडा में मियामी विश्वविद्यालय में हुई और अभी इसी तरह की दो और बहसें होनी हैं. बहस की शुरुआत करते हुए जॉन केरी ने पहले सवाल का जवाब दिया और कहा कि अमरीकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उसके सहयोगी देश कितने मज़बूत हैं जबकि राष्ट्रपति बुश ने अपने सहयोगी देशों को ही बिखेर कर रख दिया है. जॉन केरी ने यह भी कहा कि इराक़ पर हमला मुख्य मुद्दे से भटकाव था और इराक़ का 11 सितंबर 2001 के हमलों से कोई संबंध नहीं था. केरी ने कहा कि अमरीका ने इराक़ पर हमला शांति की ठोस योजना के बिना ही कर दिया और अगर नीति ठीक होती तो छह महीने के अंदर वहाँ से अमरीकी सेनाएँ वापस लौट आतीं. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि वह चुनावों में अपनी जीत के लिए आश्वस्त हैं क्योंकि उन्होंने अमरीकी लोगों को यह दिखा दिया है कि देश का नेतृत्व कैसे किया जाता है. बुश ने केरी पर आरोप लगाया कि वह इराक़ पर अपनी नीति बार-बार बदल रहे हैं जिससे अमरीकी सेनाओं और अमरीका के सहयोगी देशों का भरोसा हिलता है. उन्होंने कहा कि अमरीका को आतंकवाद का मुक़ाबला करने और स्वतंत्रता के विस्तार के लिए लगातार आक्रामक नीति पर चलना होगा. बुश ने केरी के इस आरोप को ख़ारिज कर दिया कि इराक़ पर हमला करना एक ग़लत प्राथमिकता थी और दलील दी कि ओसामा बिन लादेन और सद्दाम हुसैन से निबटना ज़रूरी था. |
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