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ज़्यादातर लोग बुश के ख़िलाफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अगर जॉर्ज बुश को आज नॉर्वे में चुनाव लड़ना पड़े तो उन्हें सिर्फ़ सात प्रतिशत वोट मिलेंगे. जर्मनी, फ़्रांस, नीदरलैंड, इटली और स्पेन में भी उनके चुनाव लड़ने पर यही कहानी दोहराई जाएगी बस वोटों का प्रतिशत कुछ अलग अलग हो सकता है. जिन 35 देशों में ये सर्वेक्षण किया गया उनमें से तीस देशों के ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि दुनिया के सबसे ताक़तवर देश की कमान अब डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जॉन केरी के हाथों में सौंप दी जाए. बाक़ी देशों की जाने भी दें तो इराक़ की लड़ाई में अमरीका के सबसे क़रीबी दोस्त ब्रिटेन में भी बुश को सोलह प्रतिशत से ज़्यादा वोट नहीं मिलते. तीन देश बुश के साथ तो सवाल है कि ऐसे में बुश के समर्थक कहाँ ज़्यादा हैं. तो ऐसे देशों में एक है पोलैंड, जहाँ बुश को 31 प्रतिशत वोट मिले जबकि केरी को 26. अफ़्रीका में बुश का समर्थन करनेवाला इकलौता देश है नाइजीरिया और फ़िलीपींस में भी ज़्यादा लोग बुश के समर्थन में हैं. भारत और थाईलैंड में दोनों ही उम्मीदवारों के पक्ष में राय बराबर बंटी हुई है, लेकिन दक्षिण अमरीका के जिन नौ देशों में लोगों की राय मांगी गई उनमें से एक में भी बुश का पलड़ा केरी के मुकाबले भारी नहीं निकला. वजह लोगों के इस फ़ैसले की सबसे बड़ी वजह क्या है, इराक़ या फिर मोटे तौर पर कहें तो अमरीकी विदेश नीति. ज़्यादातर लोगों ने कहा कि इसकी वजह से वो अमरीका के बारे में बुरा सोचते हैं, सिर्फ़ तीन देशों में लोगों को लगता है कि विदेश नीति की वजह से उनकी अमरीका के बारे में राय अच्छी हुई है. लेकिन दुनिया की राय जो भी हो अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव में अभी कांटे की टक्कर ही चल रही है, और कहा यही जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी के अधिवेशन के बाद राष्ट्रपति बुश का पलड़ा कुछ भारी ही हुआ है. अमरीका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नवंबर में होने हैं. |
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