|
इराक़ जनमत को प्रभावित कर रहा है | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ की लड़ाई और वहाँ विदेशी सेना की मौजूदगी का सीधा असर अमरीका और ब्रिटेन में जनमत पर पड़ता दिख रहा है. ब्रिटेन के अख़बार फाइनेंशियल टाइम्स के ताज़ा सर्वेक्षण के मुताबिक़ देश की जनता विदेश नीति को अपनी चिंताओं में काफ़ी ऊपर रख रही है, यहाँ तक कि अर्थव्यवस्था से भी ऊपर. इसी तरह अमरीका में भी जनमत सर्वेक्षण बता रहे हैं कि रक्षा और विदेश नीति नवंबर में होने वाले चुनाव में अहम भूमिका निभाएँगे. प्रतिष्ठित समाचारपत्र फाइनेंशियल टाइम्स के जनमत सर्वेक्षण में साफ़ दिखता है कि लोगों ने रक्षा और विदेश नीति पर गहरी नज़र रखनी शुरू की है, इसे ब्रितानी जनता की राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव का एक संकेत माना जा सकता है.
हालाँकि ब्रिटेन में आम चुनाव होने में अभी कुछ समय बाक़ी है लेकिन अमरीका में नवंबर में चुनाव होने हैं, साफ़ दिख रहा है कि विदेश नीति अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा कर सकती है. अमरीका के सबसे प्रतिष्ठित शोध संस्थानों में से एक प्यू रिसर्च सेंटर का कहना है कि सत्तर के दशक में वियतनाम की लड़ाई के दौरान जिस तरह विदेश नीति आंतरिक राजनीति के केंद्र में आ गई थी, ठीक वैसा ही कुछ इस बार अमरीका में दिख रहा है. शोध संस्थान का कहना है कि अमरीका में ऐसा कम ही होता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था के मुक़ाबले, जनता विदेश और रक्षा नीति के आधार पर सरकार बनाए या हटाए. दो मुद्दे इतना तो कहा ही जा सकता है कि इराक़ का मामला अमरीकी विदेश नीति के बारे में लोगों की राय बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है, इसके साथ ही आतंकवाद का मुद्दा भी आता है. दोनों में से कौन सा मुद्दा जनता की राय को अधिक प्रभावित कर रहा है यह कहना मुश्किल है लेकिन इराक़ का मामला साफ़ तौर पर काफ़ी प्रभावी है.
अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव में बहुत कड़ी टक्कर है, यह तो सभी सर्वेक्षण मान रहे हैं, फ़ैसला शायद बहुत मामूली अंतर से हो. इसमें कोई शक नहीं रह गया है कि जनता यह देखने की कोशिश कर रही है कि अमरीकी सेना के कमांडर इन चीफ़ की भूमिका में कौन ज़्यादा खरा उतर सकता है. शायद यही वजह है कि सीनेटर जॉन केरी के वियतनाम युद्ध में हिस्सा लेने की बात को बार-बार दोहराया जा रहा है, वे एक भूतपूर्व सैनिक होने की बात याद दिलाने से कभी नहीं चूकते. बोस्टन में पिछले महीने डेमोक्रेटिक पार्टी के सम्मेलन में भी जॉन केरी ने अपने भाषण में विदेश और रक्षा नीति पर बहुत ज़ोर दिया था और इस तरह उसे ही मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने का संकेत भी. जहाँ तक आतंकवाद का सवाल है, कई सर्वेक्षण बताते हैं कि देश ज़्यादातर जनता बुश की नीतियों को सफल मानती है, लेकिन जब इराक़ का मामला आता है तो सिर्फ़ 40 प्रतिशत लोग मानते हैं कि बुश के नेतृत्व में ठीक काम हो रहा है. अब नवंबर तक इंतज़ार करिए और देखिए, अमरीकी चुनाव में निर्णायक भूमिका इराक़ की होती है या आतंकवाद की. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||