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अमरीकी सैनिक वापस बुलाए जाएंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एशिया और यूरोप से बड़े पैमाने पर अपने सैनिकों की वापसी की योजना को मंज़ूरी दे दी है. अमरीकी सैनिकों की तैनाती के बारे में इसे शीत युद्ध के बाद का सबसे बड़ा फ़ैसला माना जा रहा है. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि अगले 10 वर्षों में 70 हज़ार सैनिकों को वापस बुला लिया जाएगा क्योंकि या तो कई देशों में स्थित सैनिक ठिकानों को या तो बंद कर दिया जाएगा या फिर उन्हें दूसरे सैनिक ठिकानों में मिला दिया जाएगा. योजना के अनुसार सैनिकों के परिवार के सदस्य और असैनिक कर्मचारी भी स्वदेश लौट आएँगे. इनकी संख्या क़रीब एक लाख है. राष्ट्रपति बुश ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अमरीका इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में अपना मिशन पूरा करेगा और इस फ़ैसले से यहाँ सैनिकों की तैनाती पर कोई असर नहीं पड़ेगा. अमरीकी सैनिकों की स्थिति के बारे में तीन साल की समीक्षा के बाद राष्ट्रपति बुश ने कहा कि नई योजना से अमरीकी सैनिकों को दुनियाभर में तेज़ी से तैनात किया जा सकेगा और उनका प्रभावी इस्तेमाल भी हो सकेगा. बचत उन्होंने कहा कि इस बदलाव से अमरीका के रक्षा बजट में बचत होगी और सैनिकों के परिवारवालों का तनाव भी कम होगा. उन्होने एक बार फिर इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में सैनिक कार्रवाई के अपने फ़ैसले को जायज़ ठहराया. बुश ने कहा, "सोवियत संघ से अब कोई ख़तरा नहीं है और इस कारण अमरीका अब नए ख़तरों से निपटने की तैयारी कर रहा है." उन्होंने कहा कि वे यह भरोसा देना चाहते हैं कि अमरीकी सेना पूरी तरह तैयार है और भविष्य में किसी भी तरह के ख़तरे से निपट सकती है.
बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जॉनाथन मारकस मानते हैं इसके पीछे अमरीका के कुछ कूटनीतिक संकेत भी हैं जो आने वाले दिनों में काफ़ी महत्वपूर्ण हो सकते हैं. जॉनाथन का मानना है कि 10 वर्ष बाद अमरीकी रक्षा मंत्रालय को ये एहसास हुआ है कि शीत युद्ध ख़त्म हो चुका है और अब पश्चिमी यूरोप में अपने सैनिकों की तैनाती से उसे कोई फ़ायदा नहीं होने वाला. इसी तरह दक्षिणी कोरिया में भी अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी उत्तर कोरिया के हमले से उसे बचाने के लिए बहुत मंहगी साबित हो रही है. हालाँकि बुश की इस योजना को अमरीका की भविष्य की सुरक्षा ज़रूरतों के तहत बनाई गई नीति बताया जा रहा है लेकिन उनके विरोधियों का कहना है कि वे चाहे जो कहें लेकिन इससे इराक़ में अमरीकी सैनिको की मुश्किलें कम नहीं होने वाली. |
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