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इराक़ के पूर्व परमाणु अधिकारी का दावा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में सद्दाम हुसैन के शासन के दौरान देश के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख रहे जाफ़र ज़िया जाफ़र का कहना है कि इराक़ ने अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम 1991 में ही ख़त्म कर दिया था और फिर दोबारा कभी शुरु नहीं किया. जाफ़र ज़िया ने बीबीसी टेलीविज़न को बताया कि इराक़ पर लगे प्रतिबंधों और हथियार निरीक्षण की वजह से ये कार्यक्रम दोबारा शुरु नहीं हो पाया. जाफ़र लगभग 25 वर्षों तक इराक़ के परमाणु कार्यक्रम के कर्तधर्ता रहे हैं. उल्लेखनीय है कि अमरीका और ब्रिटेन ने यही तर्क दिया गया था कि सद्दाम हुसैन के पास महाविनाश के हथियार हैं और ये कि वो अपना परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरु करने का प्रयास कर रहे हैं. जाफ़र का दावा है कि उनसे परमाणु बम बनाने को कहा गया था लेकिन फिर यह कार्यक्रम जुलाई 1991 में सद्दाम हुसैन के निर्देशों पर ख़त्म कर दिया गया था. बीबीसी को दिए गए अपने पहले इंटरव्यू में जाफ़र का कहना था “हमें आदेश दिया गया कि परमाणु यंत्र रिपब्लिकन गार्ड्स को सौंप दें और रिपब्लिकन गार्ड्स को आदेश था कि जो परमाणु यंत्र हमने उन्हें सौंपें हैं उन्हें वे नष्ट कर दें.” जाफ़र का कहना था कि परमाणु हथियारों से संबधित सभी सामान नष्ट कर दिया गया ताकि उसे कभी दोबारा शुरु न किया जा सके. दूसरी ओर, हथियार निरीक्षकों का कहना है कि जाफ़र के टालमटोल वाले रवैये और परमाणु कार्यक्रम के बारे में सही जानकारी न देने की वजह से ही उनका ये मत बना कि कुछ तो है जो इराक़ छिपा रहा है. इस बारे में जाफ़र ज़िया का कहना है कि ब्रितानी सरकार का ये आकलन कि इराक़ ने नाइज़र से यूरेनियम की ख़रीद की कोशिश की थी, पूरी तरह बेबुनियाद है. उनका यह भी कहना है कि अमरीकी ख़ुफ़िया विभाग ने उनसे संपर्क किया था और कहा गया था कि वह उनका साथ दें लेकिन पिछले वर्ष युद्ध के दौरान बग़दाद का पतन होने तक वे इराक़ में बने रहे और वहाँ से तभी भागे जब वहाँ गठबंधन सेनाओं का क़ब्ज़ा हो गया. |
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