|
बुश ने आयोग के गठन की घोषणा की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने एक स्वतंत्र आयोग के गठन की घोषणा की है. यह आयोग उन ख़ुफ़िया सूचनाओं की जाँच करेगा जिनका उपयोग इराक़ पर हमले के लिए किया गया था. इन ख़ुफ़िया सूचनाओं में कहा गया था कि इराक़ महाविनाश के हथियार बना रहा है जिसमें रासायनिक और जैविक हथियार शामिल हैं. उधर ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर पर भी इसी तरह की जाँच के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है. बीबीसी के राजनीतिक संवाददाता का कहना है कि ब्रितानी सरकार ने अपना रुख़ बदल लिया है और प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने पुख़्ता संकेत दिए हैं कि ब्रितानी सरकार भी बुश के रास्ते पर चल सकती है. जाँच का दायरा इस आयोग के गठन की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि यह एक स्वतंत्र आयोग होगा. उन्होंने कहा, ''इस आयोग की जाँच का दायरा व्यापक होगा और यह देखेगा कि आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई में और बेहतर क्या किया जा सकता है.'' उन्होंने कहा कि आयोग हथियारों के प्रसार की चुनौतियों की भी जाँच करेगा. राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि उन्होंने अमरीका के पूर्व मुख्य हथियार निरीक्षक डेविड के को चर्चा के लिए व्हाइट हाउस बुलवाया है. उल्लेखनीय है कि डेविड के बयान के बाद से ही अमरीकी सरकार पर दबाव बढ़ा. डेविड के ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि इराक़ में महाविनाश के हथियार हैं. अमरीका के इस आयोग में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट प्रतिनिधियों के अलावा स्वतंत्र विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा. बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता के अनुसार राष्ट्रपति बुश इस आयोग का गठन कर इराक़ मामले के चुनावी मुद्दा बनने से रोकना चाहते हैं. अमरीका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं. ब्रिटेन में दबाव इधर ब्रितानी प्रधानमंत्री ब्लेयर ने इराक़ पर हमले की जो वजहें बताई थीं वे अमरीकी राष्ट्रपति बुश के कारणों की तरह नहीं होकर इराक़ के मौजूदा और ख़तरनाक हथियारों को लेकर थीं.
अभी तक इराक़ के पास से किसी तरह के हथियार नहीं मिले हैं इसलिए ख़ुफ़िया जानकारी के बारे में जाँच के लिए ब्रिटेन सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि इराक़ में हथियारों की तलाश कर रहे विशेषज्ञों की अंतिम रिपोर्ट आने का इंतज़ार करना चाहिए. मगर इस रुख़ पर कायम रहना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है. हालांकि बुश का रुख़ बदलने के बाद से ब्रितानी सरकार का रवैया भी बदला हुआ सा दिख रहा है. ब्रिटेन में भी विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी सरकार से ख़ुफ़िया सूचनाओं की जाँच कराने की माँग कर रही है. पार्टी नेता माइकल हावर्ड ने युद्ध से पहले तो इसका समर्थन किया था मगर अब वह कह रहे हैं कि इस बारे में कुछ ग़लतियाँ हुई हैं और ऐसी ग़लतियाँ भविष्य में नहीं हों इसकी व्यवस्था होनी चाहिए. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||