|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ख़ुफ़िया एजेंसियाँ ग़लत थीं- डेविड के
इराक़ में भारी तबाही वाले ख़तरनाक हथियारों की तलाशी के अभियान का नेतृत्व करनेवाले हथियार निरीक्षक डेविड के ने कहा है कि दुनिया भर की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ये ग़लत निष्कर्ष निकाला कि इराक़ के पास रासायनिक और जैविक हथियार हैं. डेविड के ने पिछले सप्ताह तलाशी दल के प्रमुख के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्होंने बुधवार को अमरीकी सीनेट की एक प्रभावशाली समिति के सामने अपने बयान में कहा कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों के पास उतना सामर्थ्य नहीं है जितना कि होना चाहिए. डेविड के ने इस्तीफ़ा देते समय जो बातें कही थीं वही बातें उन्होंने सीनेट की समिति के सामने दोहरा दी. उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने अमरीका के राजनेताओं को ये ग़लत जानकारी दी कि इराक़ के पास ऐसे विनाशकारी हथियार हैं. साथ ही उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ख़ुफ़िया विशेषज्ञों पर बुश प्रशासन की ओर से ऐसा कोई दबाव नहीं डाला गया जिससे वे ऐसी रिपोर्ट दें जिससे कि इराक़ पर किए गए हमले को सही ठहराया जा सके. समीक्षा की ज़रूरत डेविड के ने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियाँ जिस तरह नीति निर्माताओं को सूचनाएँ दे रही हैं उस प्रक्रिया की बिल्कुल तह में जाकर समीक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि खुफ़िया एजेंसियों का ग़लत साबित होते रहने का इतिहास बड़ा पुराना है. उन्होंने ईरान और लीबिया को बिल्कुल ताज़ा उदाहरण बताते हुए कहा कि वहाँ ख़ुफ़िया एजेंसियों ने परमाणु ख़तरों को बिल्कुल कम करके आंका. उन्होंने कहा कि इन देशों का परमाणु कार्यक्रम कहीं ख़ुफ़िया एजेंसियों की जानकारी से कहीं ज़्यादा आगे निकला. देखा जाए तो ऊपरी तौर पर ऐसा लगता है कि डेविड के इराक़ पर हमला करने की बुश प्रशासन के फ़ैसले की आलोचना कर रहे हैं मगर दरअसल डेविड के ने इस बारे में बेहद सावधानी बरती है. उन्होंने अपनी बातों में ज़ोर देकर कहा है कि सद्दाम हुसैन सदा से भारी विनाश वाले हथियार पाने की फ़िराक में थे और ऐसे में इराक़ पर हमला करना एक समझदारी भरा फ़ैसला था. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||