|
पत्रकारों को नजफ़ छोड़ने के आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में पत्रकारों को नजफ़ शहर छोड़ने के लिए कहा गया है. शिया नेता मुक़्तदा अल-सद्र और अमरीकी सेना के बीच इस शहर में भीषण संघर्ष हुआ है. प्रेक्षकों का कहना है कि पत्रकारों को शहर छोड़ने के लिए कहने से शहर में किसी बड़े हमले का संकेत मिलता है. उधर पेरिस स्थित मीडिया संगठन 'रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स' ने पत्रकारों को शहर से बाहर करने के पुलिस के फ़ैसले की आलोचना की है. शहर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "अब से ये शहर बंद है." इसके बाद भी अगर कोई पत्रकार वहीं रहने का फ़ैसला करता है तो उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है. इस बीच बग़दाद में जारी सम्मेलन में सुरक्षा का मसला ख़ासा अहम रहा है. वहीं नजफ़ में रविवार को भी गोलियों की आवाज़ें सुनाई पड़ती रहीं. संघर्ष विराम को लेकर बातचीत विफल होने के बाद सरकार ने सैनिक कार्रवाई फिर शुरू करने का संकल्प व्यक्त किया है. अल-सद्र के समर्थक अब भी हज़रत अली के मज़ार में शरण लिए हुए हैं. इधर गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता सबा करीम का कहना है कि जल्दी ही सेना एक बड़ा अभियान शुरू करेगी जिससे नजफ़ में संघर्ष का अंत हो. उनका कहना था कि सरकार मसले को जल्दी से जल्दी सुलझाकर वहाँ शांति कायम करना चाहती है. अंतरिम परिषद उधर रविवार को बग़दाद में हुई बैठक में धार्मिक और राजनीतिक नेताओं को 100 सदस्यीय अंतरिम परिषद का चुनाव करना है जिससे अगले वर्ष की शुरुआत में स्वतंत्र चुनाव कराए जा सकें. मगर अल-सद्र ने इस बातचीत का बहिष्कार किया है. वहीं अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि ये बातचीत के क्षितिज की ओर पहला क़दम है. गठित होने के बाद नई अंतरिम परिषद सरकार के कामकाज पर नज़र रखने के साथ ही अगले साल होने वाले चुनाव की तैयारी भी करेगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||