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नजफ़ के ज़्यादातर हिस्से पर अमरीकी नियंत्रण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नजफ़ शहर के ज़्यादातर हिस्सों पर अमरीकी और इराक़ी सैनिकों ने नियंत्रण हासिल कर लिया है. नजफ़ में पिछले आठ दिनों से चल रही लड़ाई में इसे निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, अमरीकी सेना ने पहले ही कहा है वह शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थक छापामारों का ख़ात्मा करने के लिए अभियान शुरू कर चुकी है. शियाओं के पवित्रतम शहरों में से एक, नजफ़ में चारों तरफ़ काला धुआँ दिखाई दे रहा है. मुक़्तदा अल सद्र के समर्थक एक हज़ार छापामारों को शहर से निकालने के लिए अमरीका ने टैंकों, हेलिकॉप्टरों और लगभग दो हज़ार सैनिकों के साथ धावा बोला है. अमरीकी सेना ने हज़रत अली के मज़ार को भी चारों ओर से घेर लिया है, इस मज़ार को शिया मुसलमान सबसे पवित्र स्थानों में से एक मानते हैं. बीबीसी संवाददाता ने नजफ़ से ख़बर दी है कि शिया छापामारों ने रॉकेट से गोले दागे हैं और अमरीकी सैनिकों की भारी गोलीबारी के बावजूद उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में छापामार हज़रत अली के मज़ार में जा छिपे हैं, जहाँ अमरीकी सैनिकों ने घेरा डाला है. नजफ़ के पूर्व में भी अमरीकी सैनिकों ने विद्रोहियों को निशाना बनाया है, कुत में चल रही लड़ाई में अब तक 70 लोगों के मारे जाने की ख़बर है. पिछले आठ दिनों से मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों और अमरीकी सेना के बीच ज़ोरदार लड़ाई चल रही है जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं. लड़ाई गुरूवार को बड़ी संख्या में हेलिकॉप्टरों और टैंकों के साथ लगभग दो हज़ार अमरीकी सैनिक एक हज़ार छापामारों से लड़ रहे हैं, इस लड़ाई में अमरीकी सेना का साथ देने के लिए लगभग 1800 इराक़ी सैनिक भी हैं.
अमरीकी सैनिकों ने मुक़्तदा अल सद्र के घर को भी निशाना बनाया है, वहाँ भारी गोलीबारी हुई है लेकिन यह नहीं पता कि मुक़्तदा अल सद्र वहाँ थे या नहीं. बुधवार से ही अमरीकी सैनिक स्थानीय नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि वे नजफ़ से बाहर निकल जाएँ, बड़ी संख्या में लोग नजफ़ से बाहर गए भी हैं. समाचार एजेंसी एएफ़पी के संवाददाता का कहना है कि "ज़्यादातर नागरिकों के चले जाने के बाद नजफ़ एक भुतहा शहर लगने लगा है." मुक़्तदा अल सद्र के एक प्रमुख सहयोगी और मेहदी सेना के प्रमुख कमांडर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा है कि वे लड़ाई जारी रखेंगे. उन्होंने कहा, "हम अपने किसी ठिकाने पर हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं." पवित्र मज़ार बग़दाद से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी सेना हज़रत अली के मज़ार को नुक़सान पहुँचाने का जोखिम नहीं ले सकती क्योंकि वह शिया मुसलमानों के पवित्रतम तीर्थों में से एक है.
अगर मज़ार को क्षति पहुँची तो इराक़ के शिया मुसलमानों के लिए यह बहुत बड़ा सदमा होगा, इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी और अमरीकी सेना ने कहा है कि उनका मज़ार पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है. इराक़ के सबसे प्रभावशाली शिया नेता आयतुल्लाह अली अल सिस्तानी ने दोनों पक्षों से अनुरोध किया है कि वे संयम बरतें ताकि मज़ार को नुक़सान न पहुँचे. सिस्तानी ने कहा है, "यह बहुत दुख की बात है, दोनों पक्षों को नजफ़ की पवित्र भूमि और पवित्र मज़ार का सम्मान करना चाहिए." अमरीकी सेना ने कहा है कि उन्होंने मेहदी सेना के 300 छापामारों को मार डाला है लेकिन मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों का कहना है कि मारे गए उनके साथियों की संख्या इससे बहुत कम है. |
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