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इराक़ में मौत की सज़ा बहाल हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ की अंतरिम सरकार ने हत्या, अपहरण, नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा पहुँचाने वाले अपराधों के लिए मौत की सज़ा बहाल करने का ऐलान किया है. पिछले साल जब अमरीकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं ने राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटा दिया था तभी मौत की सज़ा समाप्त कर दी गई थी. लेकिन अभी यह साफ़ नहीं है कि क्या मौत की सज़ा बहाल करने का नया क़ानून सद्दाम हुसैन पर भी लागू होगा, अगर उनके ख़िलाफ़ युद्धापराध साबित हो जाते हैं. अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने एक दिन पहले ही शनिवार को कुछ छोटे अपराधों में आम माफ़ी देने का ऐलान किया था. नजफ़ उधर शिया बहुल शहर नजफ़ में अमरीकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं और शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों के बीच भारी लड़ाई जारी है. राजधानी बग़दाद के सिटी सद्र इलाक़े में भी लड़ाई की ख़बरें हैं. प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने रविवार को नजफ़ का दौरा भी किया और लड़ाकों से अपने हथियार डालकर शहर से बाहर चले जाने को कहा. ईरानी राजनयिक ईरान ने अपने एक राजनयिक के लापता होने की पुष्टि की है. इससे पहले कुछ इराक़ी चरमपंथियों ने इस राजनयिक का अपहरण करने की बात कही थी.
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि फ़रीदौन जहानी नामक यह राजनयिक बग़दाद से करबला जाते वक़्त लापता हो गए थे. वहाँ उन्हें ईरानी दूत के पद की ज़िम्मेदारी संभालनी थी. मंत्रालय ने कहा है कि उनका पता लगाने की तमाम कोशिशें नाकाम हो गई हैं. उधर अरबी टेलीविज़न चैनल अल अरबिया ने एक वीडियो दिखाया है जिसमें कुछ चरमपंथियों को ख़ुद को इस्लामिक आर्मी बताते हुए दिखाया गया और उन्होंने जहानी का अपहरण करने का दावा किया है. चरमपंथियों ने इस राजनयिक पर जातीय हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है. |
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