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नजफ़ के इलाक़े ख़ाली करने को कहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अमरीकी सैनिकों और शिया नेता मुक़्तदा अल-सद्र के समर्थकों के बीच चल रहे संघर्ष के छठे दिन अमरीकी विमानों ने लड़ाकुओं के ठिकानों को फिर से निशाना बनाया है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शहर के एक पुराने क़ब्रिस्तान के पास से धुआँ उठता दिख रहा है. दिनभर वहाँ भीषण संघर्ष होता रहा. इससे पहले नजफ़ में अमरीकी सेनाओं ने सभी लोगों को उस इलाक़े से चले जाने को कहा जहाँ छह दिनों से भारी लड़ाई चल रही है. नजफ़ के गवर्नर ने बीबीसी को बताया कि शिया चरमपंथी घरों और स्कूलों को भी निशाना बना रहे हैं लेकिन शहर के ज़्यादातर इलाक़ों पर लड़ाई का कोई असर नहीं है और वहाँ शांति है. लेकिन इराक़ में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह लड़ाई अंतरिम सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है. इस बीच राजधानी बग़दाद में भी बम धमाकों की आवाज़ें सुनी गई हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बग़दाद में कर्फ़्यू लगाए जाने से भी शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थक बाहरी इलाक़ों में जाने से नहीं रुक रहे हैं, जहाँ से वे रॉकेटों और मोर्टारों से हमले कर रहे हैं. भारी संघर्ष ख़बरें हैं कि दोनों ओर से गोलीबारी जारी है. हिंसा में तेज़ी मुक़्तदा अल सद्र के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने सोमवार को कहा था कि ख़ून के आख़िरी क़तरे तक संघर्ष किया जाएगा. दूसरी ओर अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि संघर्ष के बावजूद अमरीकी सैनिक नजफ़ में लगातार आगे बढ़ रहे हैं. हालाँकि बुश ने यह नहीं बताया कि अमरीकी सैनिक मुक़्तदा अल सद्र को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं या जान से मारने की. नजफ़ में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता के अनुसार वहाँ अब संघर्ष कम होने की बजाय बढ़ता ही दिख रहा है. बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के मद्देनज़र पोलैंड के नेतृत्व वाली बहुराष्ट्रीय सेना ने नजफ़ और क़दीसिया प्रांत की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अब अमरीकी सैनिकों को सौंप दी है. |
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