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शुक्रवार, 13 अगस्त, 2004 को 23:13 GMT तक के समाचार
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नजफ़ में संघर्ष विराम के बाद शांति
मुक़्तदा अल सद्र
मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों ने पिछले आठ दिनों से नजफ़ में सशस्त्र विद्रोह छेड़ा हुआ है
इराक़ के शिया बहुल शहर नजफ़ में नौ दिनों तक तक चली लड़ाई के बाद शुक्रवार को शांति रही.

अमरीकी नेतृत्ववाली गठबंधन सेनाओं के एक प्रवक्ता का कहना है कि अब उनके सैनिक सिर्फ़ आत्मसुरक्षा में ही गोली चलाएंगे और अरबी टीवी चैनल अल जज़ीरा की ख़बर है कि गठबंधन सेनाएँ शहर के मुख्य इलाक़े से हट गई हैं.

नजफ़ में अमरीका, इराक़ सरकार के बलों और शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों के बीच भारी लड़ाई हो रही थी.

लेकिन अब दोनो पक्षों के बीच अस्थाई संघर्षविराम हो गया है और दोनों पक्षों का कहना है कि लड़ाई पूरी तरह बंद करने के लिए बातचीत चल रही है.

बातचीत जारी है लेकिन...
 बातचीत जारी है और मुक़्तदा अल सद्र के एक प्रतिनिधि ने बग़दाद से आए एक प्रतिनिधि मंडल से बात भी की है लेकिन ये वार्ताएँ काफ़ी कठिन हैं और हम कह सकते हैं कि गतिरोध बरक़रार है.
मुक़्तदा अल सद्र के प्रवक्ता

लेकिन मुक़्तदा अल सद्र के एक प्रवक्ता शेख़ अहमद शैबानी का कहना है कि किसी नतीजे पर पहुँचलपाना आसान नहीं होगा.

शेख़ अहमद शैबानी, "बातचीत जारी है और मुक़्तदा अल सद्र के एक प्रतिनिधि ने बग़दाद से आए एक प्रतिनिधि मंडल से बात भी की है लेकिन ये वार्ताएँ काफ़ी कठिन हैं और हम कह सकते हैं कि गतिरोध बरक़रार है."

शेख़ अहमद शैबानी ने कहा कि गतिरोध की वजह ये है कि हम कह रहे हैं कि मुक़्तदा अल सद्र की राजनीतिक लाईन और उनके लड़ाकुओं की लाईन में कोई फ़र्क़ नहीं होगा.

शिया नेता के एक प्रतिनिधि ने ये भी कहा है कि पूरी तरह से शांति स्थापित करने में सबसे बड़ी अड़चन सरकार की ये माँग है कि विद्रोही पूरी तरह हथियार डाल दें.

इस बीच इराक़ में कई स्थानों पर अंतरिम सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं.

ग़ौरतलब है कि अमरीकी सैनिकों और मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों के बीच नजफ़ में हज़रत अली के मज़ार के पास भीषण गोलाबारी हुई थी और इसे लेकर लोगों में काफ़ी नाराज़गी है.
अमरीकी सैनिकों ने नजफ़ में हज़रत अली के मज़ार को घेर लिया जहाँ शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों ने मोर्चा बनाया हुआ था.

मगर बग़दाद से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी सेना हज़रत अली के मज़ार को नुक़सान पहुँचाने का जोखिम नहीं ले सकती थी क्योंकि वह शिया मुसलमानों के पवित्रतम तीर्थों में से एक है.

सीस्तानी ने कहा, "यह बहुत दुख की बात है. दोनों पक्षों को नजफ़ की पवित्र भूमि और पवित्र मज़ार का सम्मान करना चाहिए."

सद्र के समर्थक
बहुत से समर्थक मारे भी गए हैं

अमरीकी सेना ने घोषणा कर दी थी कि कोई भी अमरीकी सैनिक हज़रत अली के मज़ार के भीतर नहीं जाएगा.

इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री इयाद अलावी ने भी कहा था कि हज़रत अली की मज़ार पर हमला नहीं होगा.

इस बीच अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने उम्मीद जताई है कि नजफ़ संघर्ष का जल्दी ही कोई शांतिपूर्ण हल निकल आएगा.

लेकिन उन्होंने कहा कि अमरीकी और इराक़ी सेनाएँ तब तक नजफ़ की घेराबंदी जारी रखेंगी जब तक कि मुक़्तदा अल सद्र के समर्थक "ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ" बंद नहीं कर देते.

पॉवेल ने पुष्टि करते हुए कहा कि अमरीकी सेनाएँ हज़रत अली के मज़ार पर हमला नहीं करेंगी.

अगर मज़ार को क्षति पहुँची तो इराक़ के शिया मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है.
इराक़ के सबसे प्रभावशाली शिया नेता आयतुल्लाह अली अल सीस्तानी ने दोनों पक्षों से अनुरोध किया है कि वे संयम बरतें ताकि मज़ार को नुक़सान न पहुँचे.

संयुक्त राष्ट्र

इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ में अपना दफ़्तर शुक्रवार को फिर से खोल दिया.

संयुक्त राष्ट्र कोफ़ी अन्नान के विशेष दूत अशरफ़ जहाँगीर क़ाज़ी शुक्रवार को राजधानी बग़दाद पहुँच गए.

अशरफ़ जहाँगीर क़ाज़ी भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके हैं.

लगभग एक साल पहले बग़दाद में संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय पर हुए भीषण हमले के बाद वह दफ़्तर बंद कर दिया गया था.

उस हमले में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि की भी मौत हो गई थी.

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