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नजफ़ पर एक और हमले की आशंका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में विद्रोही नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों के साथ बातचीत विफल रहने के बाद इराक़ी सरकार ने नजफ़ में शिया लड़ाकों के ख़िलाफ़ और सैन्य कार्रवाई का संकल्प ज़ाहिर किया है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुवक़्क़फ़ अल-रुबाई ने कहा है कि उन्हें इस बातचीत के विफल रहने का गहरा अफ़सोस है. मुक़्तदा अल सद्र ने कहा था कि जब तक अमरीकी सेनाएँ नजफ़ की घेराबंदी किए हुए हैं तब तक इराक़ में लोकतंत्र की बहाली नामुमकिन है. यह सब कुछ ऐसे समय पर हो रहा है जब रविवार को इराक़ में एक राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है.
यह सम्मेलन इराक़ में नेशनल असेंबली के 100 सदस्यों के निर्वाचन में अहम भूमिका निभाएगा. अल सद्र के एक प्रवक्ता ने नजफ़ में बातचीत की विफलता के लिए इराक़ी प्रधानमंत्री को दोषी ठहराया. प्रवक्ता अली समीज़िम ने कहा, यह नरंसहार की तैयारी की साज़िश है. शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों और अमरीकी सेना के बीच एक हफ़्ते से ज़्यादा तक चली लड़ाई के बाद हुए अस्थाई संघर्षविराम के बाद ये बातचीत हुई थी. बग़दाद में बीबीसी संवाददाता मैथ्यू प्राइस का कहना है कि यह इराक़ सरकार के लिए एक बुरी ख़बर है क्योंकि वह जानती है कि उसे नजफ़ में हिंसा का एक शांतिपूर्ण समाधान किए जाने की ज़रूरत है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जैसे-जैसे ये अड़चनें जारी हैं, मुक़्तदा अल सद्र और उनके समर्थकों के लिए समर्थन लगातार बढ़ रहा है और वह भी न केवल शियाओं की ओर से बल्कि सुन्नियों की तरफ़ से भी. |
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