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होली का मौक़ा है, अपने-अपने मन की भड़ांस निकालें और दिलों में धंसी फांस निकालें. तन-मन रंगने के बाद आरोप लगाने के बजाए रंगीन कविताएं लिखें. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बरसाने की होली में पिचकारी और लाठी का मुक़ाबला होता है. भला किसके हाथ में पिचकारी और कौन थामता है लाठियाँ और फिर क्या होता है अंजाम? | होली पर नज़ीर अकबराबादी ने भी अपनी कलम चलाई. उन्होंने लिखा-मुँह लाल गुलाबी आँखें हों, और हाथों में पिचकारी हो, तो देख बहारें होली की. | होली और बॉलीवुड का चोली-दामन का साथ रहा है. बॉलीवुड ने होली को सबसे खूब भुनाया है. 'होली' और 'होली आई रे' नाम से फ़िल्में भी बनी हैं. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||