BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 24 मार्च, 2005 को 08:36 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
लेकिन उनके चेहरों का रंग उड़ गया है

पिचकारियाँ
पिचकारियां के कारोबार में तो तेज़ी, पर कारीगर परेशान
उनकी बनाई पिचकारियां हर साल होली के दिन लोगों को इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर कर देती हैं.

लेकिन खुद उनके चेहरों का रंग उड़ गया है.

पश्चिम बंगाल में कोलकाता से सटे हावड़ा व आसपास के इलाक़ों में दिन-रात रंग-बिरंगी पिचकारियां बनाने में जुटे इन लोगों के बदरंग चेहरे अपनी कहानी खुद कहते हैं.

हावड़ा के मोहम्मद अमीन हों या उलूबेड़िया के नरेन मंडल या फिर वहीं के बारीन सरकार, सबकी कहानी एक जैसी है.

इलाके में कुटीर उद्योग के तौर पर यह काम होता है.

लेकिन कच्चे माल की बढ़ती लागत और मुनाफ़े में गिरावट ने अब उनको वैकल्पिक रोजगार की तलाश करने पर मजबूर कर दिया है.

मोहम्मद अमीन को अब इस पुश्तैनी धंधे में कोई रंग नजर नहीं आता.

वे कहते हैं, ‘कच्चे माल की दिक्कत व प्रतिद्वंद्विता बढ़ने से एक ओर जहां लागत बढ़ी है वहीं मुनाफ़े में गिरावट आई है. असली मुनाफा बिचौलिए ले जाते हैं.’

वजह

आखिर इसकी वजह क्या है?

पिचकारियां
पिचकारियों का कारोबार करने वाले मुश्किल में हैं

हावड़ा में एक प्लास्टिक फैक्ट्री चलाने वाले मोहम्मद याकूब कहते हैं, ‘बीते पांच-छह वर्षों में हालात तेजी से बदले हैं. पिचकारियों की खपत बढ़ने के बावजूद मुनाफ़ा घटा है.हमें बिचौलियों के हाथों बहुत कम कीमत पर ही माल बेचना पड़ता है. अक्सर पूरा माल भी नहीं बिक पाता.

उनका कहना है कि पहले इस सीजन की कमाई से पूरे साल का खर्च निकल जाता था. लेकिन अब इसी पर निर्भर रहें तो भूखों मरना होगा.

कोलकाता का बागड़ी बाजार पूर्वी भारत में पिचकारियों की सबसे बड़ी मंडी है.

यहां से राज्य के अलावा पूर्वी भारत के विभिन्न हिस्सों में पिचकारियों की सप्लाई की जाती है.

यहां माल सप्लाई करने वाले भवेश मंडल बताते हैं,‘निर्माताओं से ज्यादा फ़ायदा दुकानदारों को होता है. हम महाजन से कर्ज लेकर काम करते हैं. बाद में कारीगरों के भुगतान व महाजन के पैसे लौटाना भी मुश्किल होता है.’

वहां दुकान चलाने वाले निताई राय भी यह बात मानते हैं. असंगठित क्षेत्र में होने के कारण इस उद्योग को सरकार से कोई सहायता नहीं मिलती.

रंग-बिरंगी डिजाइनर पिचकारियां बनाने वालों के चेहरों पर सिर्फ़ एक ही रंग नजर आता है. और वह है उदासी का.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>