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जलती होली, निकलता पंडा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मथुरा से 54 किलोमीटर दूर कोसी शेरगढ़ मार्ग पर फालैन गाँव है जहाँ एक अनूठी होली होती है. यहाँ भक्त प्रहलाद का एक प्राचीन मंदिर है और एक प्रहलाद कुंड भी है. होलिका दहन के दिन गाँव का एक पंडा प्रहलाद कुंड में स्नान करके गाँव की चौक में लगाई गई विशाल होली की जलती लपटों के भीतर छलांग लगाकर उससे बाहर निकलता है. यह पंडा होली से पूर्व गाँव के प्रहलाद मंदिर में पूजा करता है और फिर प्रहलाद कुंड में स्नान करता है. इसके बाद जलती होली में पैर रखकर बड़ी शीघ्रता से होली से निकल जाता है. इसमें पंडा को लगभग एक से डेढ़ मिनट का समय लगता है. इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा होते हैं. पिछले कई वर्षों से फालैन गाँव का सुशील नामक पंडा इस होली में से निकलता है. गाँव के लोगों के अनुसार वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है. ऐसा नहीं कि यह करतब कोई एक ही शख्स ही दिखाता हो. जब कोई पंडा जलती होली में से निकलने में असमर्थता व्यक्त करता है तो वह अपनी पूजा करने वाली माला को मंदिर में रख देता है. इसके बाद गाँव का जो व्यक्ति उसे उठा लेता है वह जलती होली में से निकलता है. होली की धूम प्रहलाद के मेले के नाम से प्रसिद्ध फालैन गाँव की इस होली में आसपास बड़ा नगाड़ा बजाती हुई चोपल मंडलियाँ आती हैं और रात भर होली के रसिया गाँव में गूंजते रहते हैं.
फालैन में इस दिन मेला सा लगा रहता है. देश-विदेश से आने वाले दर्शक हों या स्थानीय लोग सभी इस दृश्य को देखने के लिए सांस साधे बैठे रहते हैं. फालैन की इस अनूठी होली में पंडे के निकलने का कोई निश्चित समय नहीं होता है. यह रात्रि में किसी भी समय होली से निकलता है. इस दृश्य को कैमरे में कैद करने के लिए विदेशी पर्यटकों की टोली भी होली से पूर्व इस गाँव में आ जाती है. जलती होली से निकलने वाले पंडा सुशील ने बताया कि होलिका दहन से आठ दिन पहले से वह अन्न का त्याग कर देता है और वह इसे भगवान की कृपा मानता है. लेकिन वह इसमें किसी करतब से साफ़ इनकार करता है. विशाल जलती होली से जिस समय पंडा निकलता है उस समय उस होली के आसपास खड़े रहना भी संभव नहीं होता है. लेकिन पंडा इस विशाल जलती होली से बेदाग निकल जाता है. |
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