
गुटनिरपेक्ष देशों के समूह में इस व़क्त 120 देश शामिल हैं.
गुटनिरपेक्ष देशों के आंदोलन को 50 साल पूरे हो गए हैं. आंदोलन के इस अहम मोड़ पर सभी सदस्य देशों की बेलग्रेड शहर में बैठक हो रही है.
ये शहर अब सर्बिया की राजधानी है. गुटनिरपेक्ष देशों की पहली बैठक भी बेलग्रेड शहर में हुई थी, जो तब युगोस्लाविया की राजधानी था.
लेकिन पिछले 50 सालों में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों की संख्या भी बढ़ी है और उनके उद्देश्य भी बदले हैं.
इसलिए अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या विकासशील देशों के संयुक्त सरोकारों का ये अनूठा मंच अब महज़ अप्रासंगिक बातचीत की जगह बन कर रह गया है?
लेकिन इस उभरते विवाद के पीछे गुटनिरपेक्ष देशों के आंदोलन का बहुमूल्य इतिहास है.
इतिहास
गुटनिरपेक्ष देशों का समूह शीत युद्ध के दौरान बनाया गया था. इसका मक़सद था उन देशों को साथ लाना, जो ना अमरीका के साथ थे और ना ही सोवियत संघ के पक्षधर.
गुटनिरपेक्ष देशों को एक मंच पर साथ लाने की पृष्ठभूमि पांच देशों के नेताओं ने बनाई थी.
भारत, इंडोनीशिया, घाना, मिस्र और उस वक़्त के युगोस्लाविया ने शुरुआत की. पहली बैठक युगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो की अध्यक्षता में बेलेग्रेड में हुई.
जैसे-जैसे आंदोलन बढ़ा तो समूह में अफ़्रीका और एशिया के कई देश जुड़ते गए.
पर शीत युद्ध ख़त्म होने पर इस आंदोलन का मक़सद भी फीका होता गया.
गुटनिरपेक्ष देशों के आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण ताकत ख़ो दी है.
अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार ऐलेक्सान्ड्रा ज़ोकिमोविक
आज इसका उद्देश्य है कि मानवाधिकारों का हनन ना हो और हर देश की सीमाओं का सम्मान किया जाए.
अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार ऐलेक्सान्ड्रा ज़ोकिमोविक कहती हैं, गुटनिरपेक्ष देशों के आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण ताकत ख़ो दी है.
ज़ोकिमोविक के मुताबिक भावनात्मक दृष्टि से गुटनिरपेक्ष देशों की 50वीं वर्षगांठ का बेलग्रेड में मनाया जाना ठीक है लेकिन ये सर्बिया के लिए यूरोपीय समूह का हिस्सा बनने के लिए फायदेमंद हो, ये ज़रूरी नहीं.
उनके मुताबिक़ सर्बिया को गुटनिरपेक्ष देशों के साथ जुड़ने से नहीं बल्कि यूरोपीय समूह का हिस्सा बनने से फ़ायदा होगा.
सर्बिया में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्क लोवेन के मुताबिक इस बैठक में अरब क्रांति समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी.
साथ ही बेलग्रेड को कोसोवो पर उसके आधिपत्य के मुद्दे पर समर्थन जुटाने की उम्मीद होगी.
ज़्यादातर गुटनिरपेक्ष देश कोसोवो को सर्बिया का हिस्सा मानते हैं. हालांकि कोसोवो ने वर्ष 2008 में ख़ुद को सर्बिया से आज़ाद होने की घोषणा की थी.
ज़ाहिर है इस बैठक में हिस्सा लेने वालों को ये अहसास होगा कि 50 साल पहले हुई गुटनिरपेक्ष देशों की पहली बैठक के समय की दुनिया अब से कितनी अलग थी.















