काबुल हमला: 20 घंटे के बाद कार्रवाई ख़त्म

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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में हाल में तालिबान लड़ाकों का सबसे भीषण हमला 20 घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद बुधवार सुबह ख़त्म हो गया है.
पुलिस ने कहा है कि आख़िरी तालिबान लड़ाका मारा गया है.
अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में सात आम नागिरक, चार पुलिसकर्मी और नौ बंदूकधारी लड़ाके मारे गए हैं.
मंगलवार आत्मघाती हमलावरों ने रॉकेट द्वारा संचालित ग्रेनेड और अन्य हथियारों से काबुल स्थित अमरीकी दूतावास और नैटो के नेतृत्व वाले मुख्यालय को निशाना बनाया था.
सिलसिलेवार हमले हुए थे और मंगलवार रात को भी रुक-रुक कर गोलाबारी होती रही थी. बाद में चरमपंथियों ने एक बहु मंज़िला निर्माणाधीन इमारत को अपना अड्डा बना लिया था.
इस इमारत से रात भर गोलीबारी और धमाकों की आवाज़ आती रही. बुधवार सुबह पुलिस और सेना के कमाड़ो ने इस इमारत को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है.
अफ़ग़ान सेना ने हेलिकॉप्टरों की मदद लेते हुए अभियान में सफलता हासिल की थी. हेलिकॉप्टर लगातार आख़िरी चरमपंथी पर गोलीबारी करती रहे और उसके मारे जाने के बाद ही कार्रवाई ख़त्म हुई.
निशाना: अमरीकी दूतावास, नैटो मुख्यालय
इन हमलावारों ने अमरीकी दूतावास और नैटो समर्थित सेना के मुख्यालय को अपना निशाना बनाया था.
अफ़ग़ानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री का कहना है कि इस हमले में कम से कम चार पुलिसकर्मी, दो नागरिक और नौ तालिबान लड़ाके मारे गए हैं.
इससे पहले 19 अगस्त को काबुल में ब्रिटिश काउंसिल पर भी हमला हुआ था जिसमें 12 लोग मारे गए थे.
तालिबान ने ही इस हमले की भी ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा था कि 1919 में ब्रिटेन से अफ़गानिस्तान को मिली आज़ादी की याद में हमला किया गया था.
तालिबान प्रवक्ता ने मंगलवार को हुए हमलों के बारे में कहा, "‘हमने आज सुबह काबुल के अब्दुल हक चौक पर हमला किया है जो कि एक आत्मघाती हमला है. इसमें स्थानीय और विदेशी खुफिया ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है."
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि इस हमले से देश की सुरक्षा कर रहे सुरक्षाबलों के हौसले पस्त नहीं होंगे और न ही विदेशी फ़ौजों से अफ़ग़ान सेनाओं को सत्ता हस्तांतरण में कोई विलंभ होगा.












