इतिहास के पन्नों से
इतिहास में 13 सितंबर की तारीख़ के नाम कई महत्वपूर्ण घटनाएं दर्ज हैं. इसी दिन इसराइलऔर फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के बीच शांति समझौता हुआ था और क्यूबा के एक राजनयिक ने लंदन में गोलीबारी की थी.
1993: राबिन और अराफ़ात के बीच शांति समझौता

13 सितंबर 1993 को इसराइल के प्रधानमंत्री यित्ज़ाक राबिन और फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के नेता यासिर अराफ़ात ने वॉशिंगटन स्थित अमरीकी राष्ट्रपति के आवास व्हाइट हाउस के लॉन में सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे से हाथ मिलाकर संबंधों की एक नई शुरुआत की थी.
इसी दिन दोनों पारंपरिक शत्रुओं ने अरब और इसराइल के बीच हुए शांति समझौते की घोषणा की थी.
शांति समझौते पर इसराइली विदेश मंत्री शिमॉन पेरेज़ और फ़लस्तीनी विदेश मंत्री ने दस्तख़त किए थे.
शांति समझौते के मुताबिक़ इसराइल गज़ा पट्टी और पश्चिमी तट से अप्रैल 1994 तक अपनी सेना हटाने पर सहमत हुआ था जबकि फ़लस्तीनी क्षेत्र में चुनाव करवाने की घोषणा की गई थी ताकि फ़लस्तीनियों को स्वशासन का कुछ अधिकार मिल सके.
दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौते के लिए फ़रवरी 1999 की समय सीमा तय हुई थी.
तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने इस शांति समझौते को एक ऐतिहासिक क़दम क़रार दिया था.
1988: क्यूबा ने गोलीबारी के लिए सीआईए पर आरोप लगाया

13 सितंबर को ही 1988 में क्यूबा की सरकार ने अपने एक राजनयिक का बचाव करते हुए कहा था कि उन्हें अमरीकी साज़िश में फंसाया जा रहा है.
एक दिन पहले इस राजनयिक ने लंदन की एक भीड़-भाड़ वाली सड़क पर फ़ायरिंग कर दी थी, जिसमें एक व्यक्ति मामूली रूप से ज़ख़्मी हो गया था.
ब्रितानी सरकार ने मेडिना पेरेज़ नामक राजनयिक के व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें और राजदूत ऑस्कर फ़र्नांडिस मेल को बर्ख़ास्त कर दिया था.
ख़बर के मुताबिक़ पेरेज़ जब अपने घर को लौट रहे थे तो उन्होंने कथित रूप से उनका पीछा कर रहे कुछ लोगों पर फ़ायरिंग कर दी थी.
ब्रिटेन की पुलिस का कहना था कि ज़ख़्मी व्यक्ति ब्रिटेन की सुरक्षा बल का सदस्य था, सीआईए का नहीं.












