इतिहास के पन्नों से
इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएँगे कि 12 सितंबर के दिन अमरीका ने चरमपंथ के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा की थी. इसी दिन सोवियत संघ ने चंद्रमा के लिए एक रॉकेट छोड़ा था.
2001 : अमरीका ने युद्ध की घोषणा की

इमेज स्रोत, AP
राष्ट्र के नाम एक संदेश में अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने घोषणा की कि अमरीका अपने देश की भूमि पर हुए अब तक के सबसे बुरे चरमपंथी हमले का बदला लेने के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक देगा.
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले को स्वतंत्रता पसंद करने वाले लोगों के खिलाफ़ युद्ध का क़दम बताया. साथ ही बुश ने अपने ग़ुस्से और पीड़ा से भरे देशवासियों को धैर्य रखने को कहा और कहा कि यह एक लंबी लड़ाई होगी.
बुश ने दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों से चरमपंथ के खिलाफ़ लड़ाई में साथ देने की अपील की. दुनिया भर के नेताओं सहित उन देशों के नेताओं ने भी इस हमले की निंदा की जो अमरीका के विरोधी समझे जाते थे. लीबिया और फ़लस्तीनी नेताओं ने भी इन हमलों की निंदा की.
दुनिया में केवल इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने इस हमले को सही ठहराया और कहा," ये दुनिया में सभी तानाशाहों और शोषकों के लिए सबक है."
1959 : सोवियत संघ का चंद्र अभियान

इमेज स्रोत, AFP
सोवियत संघ ने साल 1959 में इसी दिन चंद्रमा के लिए एक विशालकाय रॉकेट छोड़ा था. इस रॉकेट पर 391 किलो वैज्ञानिक उपकरण लदे हुए थे. यह चाँद के लिए सोवियत संघ का छोड़ा हुआ दूसरा रॉकेट था. इसी तरह का पिछ्ला रॉकेट 2 जनवरी को छोड़ा गया था जो विफल रहा.
कई चरणों वाला यह रॉकेट 11.3 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से उड़ता हुआ सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा के बाहर निकल गया.
दो दिन बाद यह चाँद की सतह पर पहुँचने वाला अपने किस्म का पहला रॉकेट बना. इस अभियान के बाद 12 अप्रैल 1961 को यूरी गैगरिन अंतरिक्ष में पहुँचने वाले पहले आदमी बने.












