आत्ममुग्ध लोगों से नफ़रत न करें, रहम करें!

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आपने अपने आस-पास बहुत से घमंडी लोग देखे होंगे. वो हमेशा अपनी ही डींग मारते रहते हैं. ''मैंने ये किया, मैंने वो तीर मारा'' वग़ैरह...

मनोवैज्ञानिक ऐसे लोगों को अंग्रेज़ी में 'नार्सिसिस्ट' कहते हैं. ये लफ़्ज यूनानी पौराणिक कहानियों के एक किरदार नार्सिसस से निकला है. नार्सिसस को अपने साये से ही इश्क़ हो गया था.

जब आप ऐसे घमंडी, आत्ममुग्ध लोगों से मिलते हैं तो शुरू में उनकी डींग हांकने की आदत शायद आपको अच्छी लगे. लेकिन, जब वो ये हरकत बार-बार करने लगते हैं, तो, खीझ और ग़ुस्सा आने लगता है.

मगर कुछ ताज़ा रिसर्च ये बताती है कि हमें ऐसे डींग हांकने वालों से नफ़रत करने के बजाय उन पर रहम खाना चाहिए. ऐसे लोगों को हमारी हमदर्दी की बहुत ज़रूरत होती है.

ऐसे लोग अक्सर दिल ही दिल में घबराए से रहते हैं. उन्हें ख़ुद पर कम यक़ीन होता है. ऐसे लोग डींग हांकने में तो कुछ भी कह जाते हैं, मगर जब प्रयोगशाला में उनके दिलो-दिमाग़ की हालत की पड़ताल की गई तो वो घबराए नज़र आए.

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मनोवैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया है, जिसका नाम है 'बोगस पाइपलाइन टेक्नीक'. इसमें लोगों को एक तार से जोड़ा जाता है. कुछ को कहा जाता है कि वो जब भी झूठ बोलेंगे वो पकड़ा जाएगा.

वहीं कुछ लोगों को कुछ नहीं बताया जाता. इस तजुर्बे में पाया गया कि जो लोग अहंकारी और हेकड़ीबाज़ होते हैं, उनके दिल में घबराहट मची हुई थी. उनके दिमाग़ में भी ज़्यादा तेज़ हलचल देखी गई. मतलब उन्हें डर ये था कि उनकी सच्चाई दुनिया के सामने आ जाएगी. जो डींगें वो हांक रहे थे उनका असली रुख़ सब जान जाएंगे.

वैज्ञानिकों ने एक और तरीक़े से ऐसे डींग हांकने वालों के दिल का हाल जाना है.

इसे 'ब्रेन इमेजिंग' कहते हैं. ब्रेन इमेजिंग के एक प्रयोग में देखा गया कि जो लोग हमेशा अपनी बड़ाई करते रहते हैं, वो किसी भी साझा खेल में लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचना चाहते हैं. ऐसा न होने की सूरत में वो परेशान हो जाते हैं.

अमरीका की केंटुकी यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने ऐसे आत्ममुग्ध लोगों के दिमाग़ की पड़ताल की. पता चला कि दिमाग़ का जो हिस्सा इनाम पाने पर ख़ुशी महसूस करता है, वहां पर डींग हांकने वालों के दिमाग़ में कम हलचल पाई गई.

मतलब ऊपरी तौर पर डींग हांकने वाले असल में तारीफ़ होने पर भी ज़्यादा ख़ुश नहीं हो सके. क्योंकि अपना सच उन्हें अच्छे से पता था.

अपने आप से प्यार करने वालों से हमदर्दी की यही एक वजह नहीं. जो लोग अपनी डींग बहुत हांकते हैं, वो अक्सर तनाव के शिकार होते हैं.

तनाव की वजह से उन्हें कई बीमारियां भी हो जाती हैं. उनके साथ अक्सर हादसे होते हैं. वो रिश्ते निभाने में भी अक्सर नाकाम रहते हैं.

इसलिए ज़रूरी है कि डींग हांकने वालों से नफ़रत के बजाय हमदर्दी रखी जाए.

ऐसे लोग एकदम ही बुरे नहीं होते. उनकी कुछ ख़ूबियां काम भी आ सकती हैं.

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वो नाकामी के बावजूद लगातार कोशिश करते रहते हैं. ऐसा करने वाले लोग टीम में हों तो कामयाबी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. क्योंकि ख़ुद को सही साबित करने के चक्कर में ऐसे आत्ममुग्ध लोग जमकर ताक़त लगाते हैं, ताकि कामयाब हो सकें.

कुल मिलाकर अपने में मगन लोगों के प्रति थोड़ा सब्र रखें. क्योंकि ऊपरी तौर पर ऐसे लोग भले ही सारा श्रेय लूटने वाले लगते हों. सच्चाई तो ये है कि ये लंबी रेस के घोड़े नहीं होते. ख़ास तौर से जब हालात विपरीत हों.

मतलब साफ़ है कि डींग हांकने वालों को उनका काम करने दीजिए. उनसे नफ़रत करने के बजाय उन पर रहम खाइए. इस यक़ीन के साथ कि आख़िर में जीत आपकी ही होनी है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20160802-why-we-should-pity-attention-seeking-narcissists" platform="highweb"/></link> करें, जो बीबीसी <link type="page"><caption> फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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