मैदान पर खेलते हुए क्यों मर जाते हैं काले खिलाड़ी

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- Author, जॉर्डन डनबर
- पदनाम, बीबीसी रेडियो
हाल ही में अफ्रीकी देश कोटे डे' आइवरी के फुटबॉलर शेक टिओटे की प्रैक्टिस के दौरान मैदान में ही मौत हो गई. ये हादसा चीन में हुआ.
खेल की दुनिया से आई इस बुरी ख़बर ने सबको सदमे में डाल दिया. इस हादसे से एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया.
सवाल ये कि क्या दूसरे खिलाड़ियों के मुक़ाबले अफ्रीकी खिलाड़ियों के मैदान में मरने की आशंका ज़्यादा होती है?
बीबीसी के जॉर्डन डनबार ने इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की.
बीबीसी रेडियो पर उन्होंने अपने कार्यक्रम 'मोर ऑर लेस' में सहयोगी शार्लोट मैक्डोनाल्ड के साथ मिलकर कुछ आंकड़ों और कुछ जानकारों से इस बारे में बात की.
पिछले कुछ सालों में कई खिलाड़ियों की फुटबॉल खेलते वक़्त मैदान में मौत होने की घटनाएं हुई हैं.

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फ़ुटबॉल खेलते वक्त मौत
इनमें से ज़्यादातर चर्चित घटनाओं में अफ्रीकी खिलाड़ियों का नाम शामिल है. मसलन कैमरून के मार्क विवियन फ़ो, जिनकी एक मैच के दौरान मौत हो गई थी.
या फिर कॉन्गो के फ़ैब्रीस मुआम्बा, जिनको मैदान पर ही दिल का दौरा पड़ था, मगर उनकी जान बच गई.
इस बात का कोई आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं है कि कितने लोग फुटबॉल खेलते वक़्त मौत के मुंह में समा गए.
इसीलिए जॉर्डन डनबार और शार्लोट मैक्डोनाल्ड ने इस बारे में विकीपीडिया से आंकड़े निकाले.
हालांकि ये आंकड़े पूरी तरह से क़ाबिल-ए-ऐतबार तो नहीं, मगर, फिलहाल यहीं पर इस तरह का ठोस आंकड़ा मिला.
इन आंकड़ों में उन लोगों के नाम देखे गए, जिनकी मैच खेलते वक़्त या ट्रेनिंग के दौरान मौत हो गई थी.

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दस साल में 64 की मौत
ग्लोबल स्पोर्ट्स स्टैटिस्टिक्स के रॉबर्ट मैस्ट्रोडोमेनिको ने इन आंकड़ों की मदद से कुछ बातें हमें बताईं.
उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों में क़रीब 64 फुटबॉलरों की मैदान में मौत हुई. हालांकि ये खिलाड़ी किन देशों के थे, ये पता लगाना ज़रा मुश्किल था.
यानी जो आंकड़े फिलहाल हमारे पास हैं, उनके आधार पर अपने सवाल का ठोस जवाब हासिल करना ज़रा मुश्किल है. लेकिन इनसे कुछ अहम बातें ज़रूर सामने आईं.
पता ये चला कि पिछले दस सालों में जिन 64 खिलाड़ियों की मैदान में मौत हुई, उन्में से 26 खिलाड़ी अफ्रीकी देशों के थे.
यानी मैदान पर जान गंवाने वाले कुल खिलाड़ियों में से 40 फ़ीसद अफ्रीकी देशों के थे.
यूं तो बहुत से अफ्रीकी देशों के खिलाड़ी यूरोप, अमरीका या लैटिन अमरीकी देशों में क्लब फुटबॉल खेलते हैं. ऐसे में ये आंकड़ा भी बहुत मददगार नही.

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दिल का दौरा पड़ने की आशंका
मगर इससे कुछ संकेत तो मिलते हैं. फीफा के मुताबिक़ पूरी दुनिया में क़रीब 26 करोड़ पचास लाख लोग टीमों में फुटबॉल खेलते हैं. इनमें से 17 फ़ीसद अफ्रीका में हैं.
यानी जहां दुनिया भर में फुटबॉल खेलने वाले लोगों में अफ्रीकी खिलाड़ियों की तादाद महज 17 प्रतिशत है, वहीं मैदान में मरने वाले खिलाड़ियों में 40 फ़ीसद अफ्रीकी थे.
ज़्यादातर खिलाड़ियों की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. पिछले दस सालों में जिन 26 अफ्रीकी खिलाड़ियों की मैदान में मौत हुई, उनमें से 25 की मौत हार्ट अटैक से ही हुई.
तो क्या अफ्रीकी खिलाड़ियों को दिल का दौरा पड़ने की आशंका ज़्यादा होती है? बीबीसी ने इस बारे में ब्रिटेन में दिल की बीमारियों के स्पेशलिस्ट संजय शर्मा से बात की.
उन्होंने बताया कि अमरीका में बास्केटबॉल के खिलाड़ियों को अचानक दिल का दौरान पड़ने की ज़्यादातर घटनाएं अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों के साथ हुई.
संजय शर्मा कहते हैं कि गोरे खिलाड़ियों को काले खिलाड़ियों के मुक़ाबले खेल के दौरान दिल का दौरा कम पड़ता है और सिर्फ़ बास्केटबॉल में ऐसा नही हो रहा.

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खिलाड़ियों पर रिसर्च
अमरीका के नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन के आंकड़े बताते हैं कि मैदान में दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा 48 हज़ार में से एक खिलाड़ी को होता है.
लेकिन जब हम अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों के साथ हुए हादसों को देखते हैं, तो 18 हज़ार में से एक खिलाड़ी के साथ ऐसा होने का डर होता है.
प्रोफ़ेसर संजय शर्मा कहते हैं कि ब्रिटेन में फुटबॉल एसोसिएशन ने युवा खिलाड़ियों पर इस बारे में रिसर्च किया है.
रिसर्च के मुताबिक जहां गोरे खिलाड़ियों में किन्हीं 25 हज़ार में से एक को मैदान में दिल का दौरा पड़ने का डर होता है.
वहीं काले खिलाड़ियों में हर 4 हज़ार खिलाड़ियों में से किसी एक को मैदान में हार्ट अटैक का डर होता है.
यानी, गोरे खिलाड़ियों के मुक़ाबले काले खिलाड़ियों को मैदान में दिल का दौरा पड़ने की आशंका छह गुना ज़्यादा होती है.

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वो अफ्रीकी खिलाड़ी जिनकी मैदान में मौत हुई
- इसी साल अप्रैल में गैबोन के पूर्व अंतररष्ट्रीय खिलाड़ी मोय ब्रो अपांगा की लिबरविल के क्लब में प्रैक्टिस के दौरान मौत हो गई. वो 35 बरस के थे.
- मई 2016 में कैमरून के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पैट्रिक ईकेंग की रोमानिया के डिनामो मे मैच खेलते वक़्त मौत हो गई. पैट्रिक महज 26 बरस के थे.
- ज़ैम्बिया के सास्वे सोफ्वा की इज़राइल में खेलते वक़्त 2007 में मौत हो गई थी. वो 28 बरस के थे.
- 1989 में वर्ल्ड कप क्वालिफ़ायर मैच के दौरान नाइजीरिया के खिलाड़ी सैमुअल ओक्वाराजी की अंगोला के ख़िलाफ़ खेलते हुए मौत हो गई थी. वो 25 बरस के थे.

ब्लड प्रेशर का बढ़ना
प्रोफ़ेसर संजय शर्मा कहते हैं कि अफ्रीकी खिलाड़ियों की मैदान में ज़्यादा मौत होने की वजह साफ़ नहीं.
वो मानते हैं कि अफ्रीकी खिलाड़ियों के दिल की बाएं तरफ़ की दीवार मोटी हो जाती है, जिसकी वजह से उनको दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है.
प्रोफ़ेसर संजय शर्मा कहते हैं कि अभ्यास या खेल के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इस वजह से भी दिल का दौरा पड़ने का डर बढ़ जाता है.
प्रोफ़ेसर शर्मा का ज़्यादातर रिसर्च अमरीका और ब्रिटेन में खेलने वाले अश्वेत खिलाड़ियों पर हुआ है. इससे तस्वीर और पेचीदा हो गई है.
वो कहते हैं कि पश्चिमी और पूर्वी अफ्रीका के अश्वेत खिलाड़ियों के जीन की बनावट में फ़र्क़ होता है.
संजय शर्मा का कहना है कि उनके पास पूर्वी अफ्रीकी खिलाड़ियों से जुड़े ठोस आंकड़े नहीं हैं.

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सही ढंग से पड़ताल
फिलहाल जो आंकड़े हैं, उनके हिसाब से ये कहा जाता है कि पूर्वी अफ्रीका के खिलाड़ियों को मैदान में दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं कम हुई हैं.
यानी उनको ख़तरा कम होता है. वही पश्चिमी अफ्रीकी देशों के खिलाड़ियों के साथ ये हादसे ज़्यादा पेश आए हैं.
प्रोफ़ेसर शर्मा मानते हैं कि अफ्रीकी देशों में सेहत की पड़ताल की सुविधाएं अच्छी नहीं हैं. ऐसे में खिलाड़ियों के दिल की सही ढंग से पड़ताल नहीं होती.
कुल मिलाकर मैदान में खिलाड़ियों के जान गंवाने का डर 48 से 50 हज़ार खिलाड़ियों में से किसी एक को होता है.
ऐसे में हमारे सवाल कि, क्या अफ्रीकी खिलाड़ियों के मैदान में दिल का दौरा पड़ने की आशंका ज़्यादा होती है का जवाब है कि, शायद ऐसा है.
हम किसी ठोस नतीजे पर इसलिए नहीं पहुंच सकते क्योंकि हमारे पास इस बारे में ठोस आंकड़े नहीं हैं.
खिलाड़ियों की राष्ट्रीयता और उनकी जातियों के बारे में भी साफ़ तौर से पता नहीं होता. फिर अभी इस पर कोई संस्था निगरानी करके आंकड़े भी नहीं जमा कर रही है.
हां, अब तक हुए मेडिकल रिसर्च ये कहते हैं कि मामला गंभीर है. हमें सावधान होने की ज़रूरत है.
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