50 पार नौकरी पाने के पांच हिट नुस्ख़े

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नौकरी खोजना हमेशा से असहज कर देने वाला काम रहा है. लेकिन अगर आप 50 पार कर चुके हैं तो ये अनुभव ज़्यादा ख़राब हो सकता है.
मानव संसाधन विकास कंसल्टेंट अडेक्को ने 2014 में एक रिपोर्ट में पब्लिश की थी जिसके मुताबिक 55 साल की उम्र के बाद में नौकरी हासिल करना बहुत मुश्किल होता है.
रिपोर्ट के अनुसार नौकरी के प्रस्तावों में केवल 0.5 फीसदी ही इस उम्र के लोगों के होते हैं.
इनके बाद बारी आती है 45 से 54 वर्ष की उम्र के लोगों की जिनके लिए 6.1 फ़ीसदी जॉब ऑफ़र बचते हैं.

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पांच नुस्ख़े
इसके अलावा कंसल्टेंट ली हेच हैरिसन का कहना है कि 50 पार कर गए लोगों के साथ एक बड़ी समस्या ये है कि लंबे समय तक काम करते रहने के दौरान वे नौकरी बदलने का हुनर नहीं सीख पाते.
हालांकि कई नौजवानों को बायोडाटा बनाने और इंटरव्यू देने की आदत पड़ जाती है और यही काम कई दूसरे बुज़ुर्ग हो रहे बेरोज़गारों के लिए मुसीबत बन जाता है.
इसलिए एम्प्लॉयर को ये समझाना कि नौकरी के लिए आप सबसे बेहतर व्यक्ति हैं और आपका अनुभव ही आपकी पूंजी है, ज़रूरी हो जाता है.
इस लिहाज पांच बातें ऐसी हैं जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए.

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1. दिखाइए कि आपको सीखना पसंद है
नौकरी के लिए भर्ती करते समय ज़्यादा नियोक्ता ये समझते हैं कि उम्रदराज़ हो रहे लोग ज़्यादा दबाव नहीं सह पाते और नई चीज़ें सीखने की उनकी चाहत कम हो जाती है.
इसलिए इंटरव्यू देते वक्त आपको साफ़ तौर पर ये कहने की ज़रूरत है कि आप अभी चूके नहीं हैं.
आप ये दिखाइए कि आप सीखते रहना चाहते हैं और आप अपना सबसे बेहतरीन आउटपुट देंगे.
एम्प्लॉयर को ये बताइए कि आप शिखर पर अभी नहीं पहुंचे हैं बल्कि अभी चढ़ाई जारी है.

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2. पहले से बनी धारणाओं से हतोत्साहित न हों
'यक़ीनन वो उम्रदराज हो गया है और उसे पता नहीं कि कम्प्यूटर कैसे ऑपरेट किया जाता है', 'आखिरकार पांच सालों में वो रिटायर हो जाएगा', 'वो नहीं चीज़ें नहीं सीखना चाहता, पुराने लोग कम लचीले होते हैं.'
मुमकिन है कि आप ऐसी बातें सुनते रहे हों. लेकिन इस तरह की आम धारणाओं को तोड़ने की ज़रूरत है. हतोत्साहित न हों.
आपको ये दिखाने की ज़रूरत है कि आपमें सीखने की चाहत एक 20 साल के नौजवान की तरह ही है.
अगर आप खुद पर भरोसा नहीं करते तो कोई और आप पर कैसे भरोसा करेगा.

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3. ऐसी कंपनियों की तलाश करें जो आपको सूट करे
इस बात को लेकर स्पष्ट रहें कि आप कहां काम करना चाहते हैं. और ये उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सही नौकरी की तलाश.
शुरुआत कर रहे लोगों के लिए छोटी कंपनियों में नौकरी की तलाश बेहतर मानी जाती है. उनके पास नौकरी के विज्ञापन देने और भर्ती के बजट का अभाव रहता है.
और बहुत-सी कंपनियों में तो ह्यूमन रिसोर्स जैसा कोई डिपार्टमेंट ही नहीं होता है. दूसरी तरफ बड़ी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा ज़्यादा रहती है.
ऐसी कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए जो बुज़ुर्ग लोगों के लिए प्रोडक्ट बनाती हों या फिर उन्हें सर्विस देती हों. ऐसे नियोक्ता आम तौर पर अनुभवी लोगों को तरजीह देते हैं.

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4. अपनी उम्र छुपाने की कोशिश न करें
भर्ती करने वाले ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट के लोग आम तौर पर उम्र को लेकर कोई खास पूर्वाग्रह नहीं रखते.
फिर भी अपने अनुभव और उम्र के बारे में बता देना अच्छा रहता है. किसी को इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आपने अपनी स्कूलिंग कब पूरी की थी.
अपने प्रोफ़ेशनल करियर के आखिरी 15-20 सालों पर ज़्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए.
और अगर आप लंबे समय से काम करते रहे हों तो करियर की उपलब्धियों के बारे में ज़रूर बताएं.
लेकिन याद रखें कि ये आपका रेज़्यूमे है न कि आपके प्रोफ़ेशनल करियर का आख़िरी दस्तावेज़ है.

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5. सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें
ये दिखाने के लिए आप नए ट्रेंड्स से वाकिफ़ हैं, सोशल मीडिया पर सक्रिय होना एक अच्छा तरीका है.
अगर कोई आपकी प्रोफ़ाइल फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम या लिंक्डइन पर खोजे और यहां आपका वजूद न पाए तो उम्रदराज़ लोगों को लेकर बनाई गई आम धारणाएं मजबूत होंगी.
और इसके लिए आप ख़ुद ज़िम्मेदार होंगे. आपको लिंक्डइन पर आर्टिकल्स लिखने चाहिए, फ़ेसबुक पर पोस्ट शेयर करने चाहिए और ट्विटर पर अपनी राय ज़ाहिर करने से रुकना नहीं चाहिए.
और आखिर में उन लोगों को फ़ॉलो करें जो आपकी पसंदीदा कंपनियों में काम करते हों. उनके पोस्ट शेयर करना और कॉमेंट करना न भूलें.
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