जहां शराब पीना है सफलता की गारंटी...

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    • Author, टीम स्मेडली
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

शराब पीना सेहत के लिए नुक़सानदेह है. ये तो हम सभी जानते हैं. मगर कई जगहों पर ये तरक़्क़ी के लिए ज़रूरी है, ये बात कम ही लोग समझते हैं.

बहुत से देश ऐसे हैं जहां शराब पानी की तरह पी जाती है. ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बहुत से दफ़्तरों में तो कर्मचारी दिन में भी शराब पीते हैं और ऑफिस में काम भी करते हैं. ऐसा नहीं है कि ये सभी शराब के आदी हैं, इसलिए पीते हैं. बल्कि ये इनके दफ़्तर के माहौल का हिस्सा है.

लंच टाइम में जब सभी कर्मचारी एक साथ बैठते हैं, तो, वो एक एक-एक जाम टकरा लेते हैं. माना जाता है इससे कर्मचारियों के दरमियान एक मज़बूत रिश्ता बनता है. वैसे भी ये ख़याल बड़ा मज़बूत है कि सिगरेट, तंबाकू और शराब की संगत वाला रिश्ता दीगर रिश्तों पर भारी पड़ता है.

बदल रहा है माहौल

लेकिन अब ब्रिटेन में भी माहौल बदल रहा है. फ़रवरी महीने में लॉयड्स जैसी नामी बीमा कंपनी ने लंच टाइम में शराब नोशी पर पाबंदी लगा दी है. इस पाबंदी के साथ ही ये माना जाने लगा कि ब्रिटेन में कारोबार के साथ पीने-पिलाने का चलन ख़त्म हो गया. लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे पेशे हैं जहां ऑफ़िस टाइम में शराबनोशी का चलन बरकरार है. बीमा एजेंटों का कहना है कि अच्छी डील करने के लिए उन्हें लोगो को शीशे में उतारना पड़ता है. इसके लिए अपने ग्राहक को काफ़ी समय देना पड़ता है. ऐसे में उन्हें अच्छे संबंध बनाने के लिए शराब पीनी ही पड़ती है.

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ब्रिटिश सरकार के एक अंदाज़े के मुताबिक़ जो साहिब लोग हैं, अच्छी कमाई करते हैं वो हफ़्ते में पांच दिन शराब पीते हैं. जबकि कम आमदनी वालों में बारह में से एक ही ऐसा शख्स मिलेगा जो हफ़्ते में पांच दिन शराब पीता हो. इसीलिए यहां शराब से जुड़ी बीमारियां भी लोगों को जकड़ रही हैं.

एक रिसर्चर का कहना है कि बीमा, फाइनेंस, स्टॉक ब्रोकर, होटल इंडस्ट्री जैसे कारोबार हैं जहां लोगों को मजबूरन शराब पीनी पड़ती है. कई लोगों ने तो इसीलिए अपनी नौकरी छोड़ दी क्योंकि उन्हें मजबूरी में शराब पीनी पड़ती थी. इससे उनकी सेहत को नुक़सान होता था

लंदन का लेडेनहॉल मार्केट

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लंदन की रहने वाला हाना ने तो इसी वजह से नौकरी छोड़ी थी. हाना बताती हैं कि वो अपने साथियों के साथ मिलकर रिपोर्ट तैयार करती थीं. जब सब लोग साथ बैठते थे तो शराब का दौर चलता ही था. और जब सिलसिला शुरू होता था तो जब तक काम ख़त्म नहीं होता था चलता ही रहता था. और किसी को मना करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था. एक तो आपको टीम को ख़ुश रखना होता था और दूसरे अगर आप ना कहते हैं तो आपको टीम से अलग माना जाने लगता है.

शराब पीने का रिवाज

दीगर पेशों के अलावा क़ानून के पेशे में भी शराब पीने का रिवाज बहुत आम है. जानकार कहते हैं कि क़ानून के पेशे में मुक़ाबला बहुत सख़्त होता है. लोग आगे बढ़ने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. शराब पीने का रिवाज भी उसी का हिस्सा है.

शराब

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लंदन के वक़ील पैट्रिक कई लॉ फर्म में काम कर चुके हैं. पैट्रिक का कहना है कि उनके पेशे का एक अहम हिस्सा है 'बिज़नेस डिवेलपमेंट', जिसे 'बीडी' के नाम से जाना जाता है. 'बीडी' का मक़सद है, पुराने ग्राहकों से अच्छे रिश्ते बनाए रखना, और नए ग्राहक तलाशना. इस काम में शराब की महफ़िल बहुत कारआमद साबित होती है. अब अगर आपको बिज़नेस में बने रहना है, और नए ग्राहक को अपने साथ लाना है, तो, ना चाहते हुए भी आपको शराब पीनी पड़ती है. यूं समझिए कि ये आपकी तरक़्क़ी का टोकन है. जो लोग ऐसा नहीं करते वो बिज़नेस की रेस में पिछड़ जाते हैं.

काम के वक्त शराब

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नौजवान पीढ़ी के साथ अब हालात बदलते जा रहे हैं. अब कारोबारी रिश्ते बनाए रखने के लिए शराब पीना ज़रूरी नहीं रह गया है. वर्कप्लेस हेल्थ कंसल्टेंसी की मेंबर लॉरा मॉरिसन का कहना है कि नौजवान नस्ल अपने करियर पर ज़्यादा फोकस करती है. और बार में उड़ाने के लिए उनके पास पैसा नहीं है. यूनिवर्सिटी की पढाई का ख़र्च बर्दाश्त करना ही उनके लिए मुश्किल होता है. ज़्यादातर बच्चे क़र्ज़ लेकर पढ़ाई करते हैं. अपना घर बार छोड़कर, दूसरे शहरों में रहकर नौकरी करते हैं. इसलिए उनके रहने खाने का ख़र्च भी काफ़ी बढ़ जाता है. जबकि तनख़्वाह उस अनुपात में नहीं बढ़ती.

कम हो गया है शराब का सेवन

बिज़नेस मीटिंग आज भी उसी तरह होती हैं, जैसे अब से कुछ साल पहले शराब के साथ होती थी. लेकिन अब शराब की जगह सॉफ़्ट ड्रिंक या नारियल पानी ने ले ली है. इस चलन को साल 1980 से लेकर साल 1999 तक पैदा होने वाली पीढ़ी ने आगे बढ़ाया है.

काम के दौरान शराब की जगह सॉफ्ट ड्रिंक लेते कर्मचारी

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अगर बाद की नस्लें भी इसी चलन को बरक़रार रखती है, तो, 2025 तक सारी दुनिया में करीब 75 फीसद लोग बिज़नेस मीटिंग में सॉफ्ट ड्रिंक और नारियल पानी ही पीते नज़र आएंगे. शराब पीने वालों की जमात छोटी हो जाएगी.

लेकिन इसका ये मतलब हरगिज़ नहीं है कि ऑफ़िस आवर्स में शराबनोशी पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगी. हरेक ऑफिस में कुछ लोगों की जमात ऐसी ज़रूर होगी जो चाहेगी कि सारा दिन काम करने के बाद शाम बार या पब में गुज़ारी जाए.

वो लोग शायद ग़ालिब का ये शेर गुनगुनाएं कि...

ग़ालिब छुटी शराब पर अब भी कभी कभी, पीता हूं रोज़े अब्र शबे माहताब में

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