उत्तर कोरिया: पांचवें परमाणु परीक्षण के मायने

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    • Author, ब्रूस बेनेट
    • पदनाम, वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक, रैंड

उत्तर कोरिया ने परमाणु परीक्षण किया है. ऐसा माना जा रहा है कि यह उत्तर कोरिया का पांचवां और अब तक का सबसे बड़ा परमाणु बम परीक्षण है.

इस परीक्षण के क्या मायने हो सकते हैं?

1. विस्फोट की क्षमता

इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की विस्फोटक क्षमता पहले के परीक्षणों से ज़्यादा है.

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दावा किया कि जनवरी में किया गया पिछला परीक्षण हाइड्रोजन बम परीक्षण था. इस हथियार की विस्फोटक क्षमता 6-8 किलोटन टीएनटी विस्फोटक के बराबर थी.

गौर करने लायक बात है कि यह परीक्षण इससे पहले किए गए तीसरे परीक्षण से संभवतः छोटा परीक्षण था. इसकी क्षमता 8 से 10 किलोटन थी और यह हाइड्रोजन बम नहीं था.

तीसरे की तुलना में चौथा परीक्षण ज़मीने के नीचे दो गुना दूरी पर किया गया था.

इससे लगता है कि किम जोंग उन को 50 किलोटन क्षमता वाले विस्फोट की अपेक्षा थी, जितना हाइड्रोजन बम के विस्फोट में होता है.

तो क्या इस पांचवें परीक्षण की विस्फोटक क्षमता पहले से अधिक है?

शुरुआती संकेत बताते हैं कि इसकी क्षमता 20 किलोटन है, हालांकि सियोल में अधिकारी इसे 10 किलोटन वाला विस्फोट ही मान रहे हैं.

लेकिन फिर भी यह परीक्षण चौथे से बड़ा तो है ही.

2. किम के आक्रामक इरादे

उत्तर कोरिया अपना चौथा परमाणु हथियार परीक्षण और एक उपग्रह , जिसे व्यापक रूप से लंबी दूरी की मिसाइल (इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल) माना जाता है, को इस साल पहले ही लॉन्च कर चुका है.

उत्तर कोरिया 200 कि.मी. या इससे अधिक रेंज वाली 30 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइल भी लॉन्च कर चुका है.

परमाणु हथियारों और आईसीबीएम परीक्षणों जैसी गतिविधियों के कारण उत्तर कोरिया पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध से उसकी अर्थव्यवस्था को नुक़सान का ख़तरा है.

किम जोंग-उन ये दावा भी करते हैं कि अमरीका और दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया पर हमले की तैयारी कर रहे हैं.

हालांकि ये जोंग-उन ही हैं जो प्रायद्वीप में स्थिति को तनावपूर्ण बनाए हुए हैं.

ख़ासतौर पर पांचवें परीक्षण से ये तनाव और बढ़ेगा, क्योंकि उत्तर कोरिया के पहले के परमाणु परीक्षण तीन सालों या उससे ज़्यादा के अंतराल पर किए गए.

लेकिन इस उत्तर कोरियाई नेता का देश बेहद कमज़ोर राष्ट्र है और वे ख़ुद बहुत कमज़ोर नेता प्रतीत होते हैं, जो अपनी आम जनता और कुलीन वर्ग दोनों को नियंत्रण में रखने की कोशिश में क्रूरता से पेश आते हैं.

इसलिए वे अपने मिसाइल प्रक्षेपण, परमाणु परीक्षणों और धमकियों से अपनी दूसरी विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.

यह उत्तर कोरिया के सैन्य समर्थन को भी सुरक्षित करने और अपने ख़िलाफ़ बाहरी कार्रवाई को रोकने की कोशिश है.

इस तरह की हर उकसावे की गतिविधि संकेत देती है कि किम ख़ुद पर काफी आतंरिक दबाव महसूस कर रहे हैं जिस पर से वे ध्यान हटाना चाहते हैं.

हो सकता है कि किम जोंग-उन सीमित छोटे हमलों की तैयार कर रहे हों, जैसा उनके पिता और उन्होंने 2010 में किया था?

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तब उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के योंगप्योंग द्वीप पर बमबारी की थी. माना जाता है कि इस हमले को छोटे किम ने गोपनीय योजना के तहत अंजाम दिया था.

3. क्या उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वाकांक्षा पूरी हो रही हैं

किम जोंग-उन पिछले दिसंबर से ही इस बात को लेकर निश्चिंत थे कि उनके वैज्ञानिकों ने एक हाईड्रोजन बम तैयार किया है, जो कि एक अधिक शक्तिशाली परमाणु हथियार है और वह बैलिस्टिक मिसाइल के लिए पूरी तरह फिट होगा.

लेकिन 6 जनवरी को किया गया परमाणु परीक्षण उतना भरोसेमंद नहीं था और संभवतः काफी हद तक नाकाम रहा.

इसके बाद शायद किम ने तब तक इंतज़ार किया जब तक उनके वैज्ञानिकों को ये नहीं भरोसा नहीं हो गया कि उन्होंने तकनीकी समस्या का समाधान निकाल लिया है.

इसलिए उनके परमाणु महत्वाकांक्षाओं के आंकलन के लिए हथियारों की क्षमता काफी महत्वपूर्ण होगी.

ख़ास कर अगर वे वैज्ञानिक ज़िंदा रहना चाहते हैं तो.

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4. अब चीन का क्या कहना है

कुछ महीने पहले अमरीका और दक्षिण कोरिया ने घोषणा की थी कि उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के ख़तरे से बचाव के लिए दक्षिण कोरिया के दक्षिणी इलाकों में मिसाइल निरोधी प्रणाली 'थाड' यानी टर्मिनल हाई आल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम लगाए जाएंगे.

दक्षिण कोरिया में थाड को लेकर ख़ासा विरोध है. ख़ासतौर से चीन की ओर से.

चीन तथाकथित 'महान शक्ति' की तरह कार्रवाई करने में नाकाम रहा है.

उसने अपने सहयोगी उत्तर कोरिया के उकसावे भरी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई.

अब चीन को ये तय करना है कि क्या वह सही में एक ज़िम्मेदार भूमिका निभाना चाहता है और उत्तर कोरिया पर लगाम लगाना चाहता है.

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या फिर उसे केवल अपनी सुरक्षा की चिंता है. और वो दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय क़ानून का जो उल्लंघन कर रहा है उस पर से दूसरे देशों का ध्यान हटाना चाहता है.

5. अमरीका को नज़रिया बदलने की ज़रूरत है

उत्तर कोरिया को लेकर अमरीका 'रणनीतिक धैर्य' की नीति का पालन करता रहा है और बहुत कम प्रतिक्रियाएं देता है या शक्ति संतुलन पर ध्यान देता है.

जिसके कारण उत्तर कोरिया की उकसाने वाली और परमाणु विकास की गतिविधियां जारी रहती हैं.

अमरीका को एक अलग नज़रिये की ज़रूरत है क्योंकि उत्तर कोरिया ये साबित कर रहा है कि कुछ गंभीर पहल करने के उसके इरादे पक्के हैं.

उत्तर कोरिया का ख़तरा कई मायनों में बदल रहा है जिसका जवाब अमरीका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को ढूढ़ने की ज़रूरत है.

बहरहाल यह दक्षिण कोरिया के लोगों को तय करना होगा कि क्या वे चाहते हैं कि उत्तर कोरिया के मिसाइल ख़तरों से दक्षिण कोरिया को बचाने के लिए अमरीका को तैयार रहना चाहिए.

कई लोग ऐसा चाहते हैं लेकिन कई लोग ये मानते हैं कि उत्तर कोरिया एक दोस्ताना पड़ोसी है.

इस परीक्षण से भले ही कुछ लोगों की सोच बदल जाए, लेकिन देश को उन लोगों के प्रति सचेत होना पड़ेगा जिन्हें इनसे ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता.

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