सऊदी में भारतीय- 'अब तक मदद नहीं मिली'

 सऊदी अरब

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    • Author, अमरेश द्विवेदी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सऊदी अरब में पिछले कई दिनों से लगभग दस हज़ार भारतीय भूखे-प्यासे फंसे हुए हैं.

सोमवार को संसद में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आश्वासन दिया था कि वहाँ कोई बेरोज़गार भारतीय भूखा नहीं सोएगा.

जेद्दा में फंसे हुए कई ज़रूरतमंद भारतीयों ने इस बात की पुष्टि की है कि उन तक खाने-पीेने का सामना पहुँचा लेकिन कई भारतीय अब भी ऐसे हैं जिन्हें मदद नहीं मिल पाई है.

ये लोग एक ओर खाने का सामान न ख़रीद पाने और दूसरी ओर वतन न लौट पाने की वजह से परेशान हैं.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया था कि सऊदी अरब में लोगों की परेशानी का कारण ये है कि वहां कंपनियां बंद होने के कारण कई भारतीय बेरोज़गार हो गए हैं.

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सऊदी के शहर दम्माम में लोहा पीटने का काम करने वाले औरंगज़ेब ने बीबीसी को बताया कि उन्हें भारत सरकार की ओर से अब तक कोई मदद नहीं पहुंची है.

औरंगज़ेब उत्तर प्रदेश के बिजनौर से हैं.

उन्होंने बताया, "हम भारतीय दूतावास से मदद की मांग कर रहे हैं. वो हमें किसी तरह से घर भेज दें. दूतावास वाले आते हैं और फॉर्म भरवाने की औपचारिकता करते हैं. ना हमारा हाल पूछते हैं और ना ही खाने-पीने के बारे में पूछते हैं. आस पास के लोग खाने-पीने की मदद कर रहे हैं. दिन में बस एक बार ही खाना मिल पाता है."

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उनका कहना है कि उनकी कंपनी ने नौ महीने से उन्हें तनख़्वाह नहीं दी है. कंपनी सिर्फ खाने के पैसे देती थी, वो भी तीन महीने से बंद है. रमज़ान के महीने में भी उन्हें पैसे नहीं मिले.

औरंगज़ेब का कहना है कि उनके साथ वहां 2000 लोग इन परिस्थितियों में ही फंसे हुए हैं.

उनके साथ ही कंपनी में काम करने वाले बिहार के मोहम्मद एजाज़ अहमद का कहते हैं कि वो लोग एक साल से परेशान हैं.

वो कहते हैं, "ना पर्याप्त खा रहे हैं, ना पी रहे हैं और साथ में केस भी लड़ रहे हैं. जो थोड़ा-बहुत पैसा था वो केस लड़ने में लग गया है. भारतीय दूतावास के लोग आए थे और उन्होंने भरोसा दिलाया था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन तीन महीने हो गए, कुछ नहीं हुआ. एक बार उन्होंने खाना दिया था, उसके बाद नहीं दिया."

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बिहार के ही रहने वाले सुहेल अहमद कहते हैं कि सभी की यही परेशानी है और सब घर जाना चाहते हैं.

उन्होंने बताया, "हम लोग किस तरह यहां पर गुज़ारा कर रहे हैं, यह दूतावास के लोग देख कर गए हैं. उन लोगों ने उम्मीद जगाई थी कि हम लोगों को जल्द से जल्द घर जाएंगा, पर कुछ नहीं हुआ."

वो कहते हैं, "दूतावास के अधिकारियों ने तो यह भी कहा था कि अगर केस चल रहा है, तो आप लोग दूतावास को पावर ऑफ़ अटॉर्नी दे दो. हम एक महीने में आप लोगों को घर भेज देंगे. पंद्रह दिन हो गए हैं अब तक ना पावर ऑफ़ अटॉर्नी का पेपर आया है, और ना ही इस मामले में कुछ आगे हुआ है. हमें किसी भी तरह से यहां से जाना है, भले ही हमें एयर लिफ्ट करवा दें."

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वहां फंसे उत्तराखंड के उबैद हुसैन ने कहा, "विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हमें आश्वासन दिया था कि आप लोगों को बीस-पच्चीस दिन के अंदर बुला लिया जाएगा. लेकिन इसके बावजूद इस समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है. अब बक़रीद आने वाली है. कम से कम वो इतना करें कि हम बक़रीद अपने घर पर अपने परिवार और बच्चों के साथ मना लें."

सऊदी अरब में नियमों के अनुसार विदेशी कामगारों को वतन लौटने के लिए अपनी कंपनी से इजाज़त का पत्र दिखाना होता है. सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि भारत सरकार सऊदी की सरकार से इस विषय पर बात करेंगी क्योंकि इन बहुत सारे मामलों में तो इन मज़दूरों की कंपनी वाले कंपनी बंद कर चुके हैं या फिर वहां हैं ही नहीं.

जब तक ये मामला सुलझता नहीं है, ऐसा लगता है कि तब तक सऊदी अरब में बेरोज़गार भारतीय मज़दूरों को दिक्कते झेलनी ही पड़ेंगी.

(अमरेश द्विवेदी ने सऊदी में इन लोगों से फ़ोन पर बातचीत की थी)

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