म्यूनिख शूटिंग: एक साल से हमले की तैयारी

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जर्मन अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार को म्यूनिख में नौ लोगों की हत्या करने वाला शख्स एक साल से हमले की तैयारी कर रहा था.

18 साल के अली डेविड सोनबोली ने ख़ुद को गोली मारने से पहले नौ लोगों की हत्या कर दी थी. वह अपने ग्लॉक पिस्तौल और 300 गोलियों के साथ शॉपिंग सेंटर में घुसा था.

बावेरियन प्रांत के अपराध कार्यालय ने कहा है कि सोनबोली ने हमले में इस्तेमाल पिस्तौल अवैध तरीके से इंटरनेट के माध्यम से ख़रीदी थी.

गोलीबारी की इस घटना में सात नाबालिग़ भी मारे गए थे. इसमें तीन कोसोवो, तीन तुर्की और एक ग्रीस के थे. इस हादसे में 27 लोग घायल हुए थे, जिनमें 10 की स्थिति गंभीर बनी हुई है.

इस बीच, जर्मनी के वरिष्ठ नेताओं ने म्यूनिख में गोलीबारी की घटना के बाद बंदूक़ों की बिक्री पर अंकुश लगाने की मांग की है.

जर्मनी की वाइस चांसलर सिगमार गैब्रियल ने कहा कि ख़तरनाक हथियारों तक लोगों की पहुंच को सीमित करने के लिए हर संभव उपाय किया जाएगा.

जर्मनी के गृह मंत्री थॉमस द मेजेयरे ने शूटिंग वाले शॉपिंग सेंटर का दौरा करने के बाद बंदूक़ों की बिक्री संबंधित क़ानून की समीक्षा करने की बात कही है.

इस हादसे के बाद जर्मन मीडिया से बात करते हुए गैब्रियल ने कहा था, “हम ख़तरनाक हथियारों तक लोगों की पहुंच को सीमित करने के लिए हम सबकुछ करेंगे.”

उन्होंने ये भी कहा कि इस बात की जांच हो रही है कि जर्मन-ईरानी मूल के सोनबोली ने किस तरह से हथियार हासिल किया, वह भी तब जब वह मनोवैज्ञानिक समस्याओं से ग्रसित था.

वैसे यूएस लाइब्रेरी कांग्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया भर में उन देशों में शामिल है जहां फ़ायर आर्म्स पर नियंत्रण के सबसे कड़े प्रावधान लागू हैं.

25 साल से कम आयु के किसी शख़्स को फ़ायर आर्म्स ख़रीदने के लिए पहले मनोवैज्ञानिक परीक्षण से गुज़रना होता है.

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2002 में इरफर्ट के स्कूल में हुई गोलीबारी और 2009 में विनेनडेन की गोलीबारी के बाद इससे संबंधित प्रावधानों को और कड़ा बनाया गया था.

इन दोनों घटनाओं में 16-16 लोगों की मौत हुई थी. जर्मनी में पूरी तरह ऑटोमैटिक हथियारों की बिक्री पर भी पाबंदी है. शिकार और शूटिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के अलावा दूसरी किसी वजह से सेमी ऑटोमैटिक बंदूक़ भी आप नहीं ख़रीद सकते.

इन सबके बावजूद जर्मनी दुनिया में हथियारों के स्वामित्व के हिसाब से दुनिया का चौथा बड़ा देश है. स्पाईजेल पत्रिका के 2013 के आंकड़ों के मुताबिक़ जर्मनी, अमरीका, स्विटज़रलैंड और फ़िनलैंड के बाद चौथे स्थान पर है.

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