तुर्की के 'निर्दयी' राष्ट्रपति अर्दोआन

इमेज स्रोत, Getty
तुर्की में राष्ट्रपति रेचप तैयब अर्दोआन की एके पार्टी को रवायती मुसलमान समुदाय में व्यापक समर्थन प्राप्त है जबकि विदेशों में उनकी इस बात के लिए आलोचना होती है कि वो अपने विरोधियों को ताक़त के बल पर ख़ामोश कराते हैं.
उनके आलोचक तुर्क पत्रकारों के ख़िलाफ़ जांच होती है, उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे चलाए जाते हैं जबकि विदेशी पत्रकारों का उत्पीड़न होता है और उन्हें तुर्की से निकाल दिया जाता है.
पिछले महीने तुर्की के सबसे बड़े अख़बार 'ज़मान' पर पुलिस ने छापा मारा था, जिसके बाद अख़बार के कर्मचारियों को झुकना पड़ा.
अर्दोआन की ये ताक़त सिर्फ़ तुर्की की सीमाओं के भीतर ही नहीं चलती बल्कि उनके बॉडीगार्ड्स ने अमरीका में भी पत्रकारों का उत्पीड़न किया है.

इमेज स्रोत, Reuters
तुर्की के राष्ट्रपति का अपमान करने के आरोपों में एक जर्मन कॉमेडियन के ख़िलाफ़ भी जांच चल रही है.
61 साल के अर्दोआन 2002 में सत्ता में आए थे जबकि 2001 में उन्होंने एके पार्टी का गठन किया था. 2014 में राष्ट्रपति बनने से पहले वो 11 साल तक तुर्की के प्रधानमंत्री रहे.
सत्ता तक पहुंचने का सफर
1970-1980 के दशक: वो कट्टरपंथी इस्लामी हल्कों में सक्रिय रहे और नेकमातिन एरबाकन वेलफेयर पार्टी के सदस्य रहे.
1994-1998: इस्तांबुल के मेयर रहे.
1998: वेलफेयर पार्टी पर प्रतिबंध लगा.
अगस्त 2001: अपने सहयोगी अब्दुल्ला ग्यूल के साथ मिलकर एके पार्टी बनाई.
2002-2003 - एकेपी ने संसदीय चुनावों में ज़ोरदार जीत दर्ज की. अर्दोआन प्रधानमंत्री बने.
अगस्त 2014- अर्दोआन पहली बार सीधे जनता के द्वारा चुन कर पहले राष्ट्रपति बने.

इमेज स्रोत, Reuters
एकेपी के सत्ता में आने से पहले दशकों तक तुर्की की सेना ने राजनीति में कट्टरपंथी प्रभाव को रोकने के लिए चार बार हस्तक्षेप किया.
2013 में अर्दोआन सेना ने वरिष्ठ जनरलों पर क़ाबू कर लिया जब उन्होंने 17 वरिष्ठ सैन्य अफसरों को जेल भेज दिया.
इन लोगों को एकेपी पार्टी को सत्ता से हटाने की साज़िश रचने का दोषी क़रार दिया गया.
सैकड़ों अन्य असफरों के अलावा कई पत्रकारों और धर्मनिरपेक्ष राजनेताओं के ख़िलाफ़ भी मुक़दमे चलाए गए.
अर्दोआन पर आरोप लगते हैं कि वो विरोधियों को दबाने के लिए न्यायपालिका का इस्तेमाल करते हैं.
लेकिन अर्दोआन के समर्थक उनकी तारीफ़ करते हैं. वो समझते हैं कि अर्दोआन ने उन लोगों पर हाथ डाला जो समझते थे कि वो उन्हें कोई नहीं छू सकता.
अर्दोआन ने जून 2013 में अपने ख़िलाफ़ हुए व्यापक प्रदर्शनों को कुचलने के लिए भी ताक़त का इस्तेमाल किया. ये प्रदर्शन एक पार्क गेजडी को हटाकर वहां बड़ी व्यावसायित इमारत बनाने के विरोध में हुए थे.

इमेज स्रोत, Reuters
दिसंबर 2013 में अर्दोआन की सरकार पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगे जिसमें तीन कैबिनेट मंत्रियों के बेटों समेत कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया.
अर्दोआन हमेशा अपने विरोधियों और ख़ासकर विदेश में रहे विरोधियों पर निशाना साधते रहते हैं. इनमें फहतुल्ला गुलेन सबसे अहम हैं जो अमरीका में रहते हैं.
1954 में पैदा हुए अर्दोआन एक तटरक्षक के बेटे थे. जब वो 13 साल के थे तो उनके पिता ने तुर्की के काला सागर तट से इस्तांबुल आने का फैसला किया.
बचपन के दिनों में अर्दोआन ने अतिरिक्त पैसा कमाने के लिए इस्तांबुल की सड़कों पर नींबू से बनी ड्रिक और बन बेचे थे.
इस्तांबुल की मारमरा यूनिवर्सिटी से प्रबंधन में डिग्री हासिल करने से पहले उन्होंने एक इस्लामी स्कूल में शिक्षा हासिल की थी.
यूनिवर्सिटी में ही उनकी मुलाक़ात नेकमातिन एरबाकन से हुई जो तुर्की के पहले इस्लामी कट्टरपंथी प्रधानमंत्री बने और इस तरह तुर्की का इस्लामी कट्टरपंथी आंदोलन शुरू हुआ.
1994 में अर्दोआन इस्तांबुल के मेयर बने और उनके आलोचक भी मानते हैं कि उन्होंने अच्छा काम किया और शहर को पहले से अधिक साफ़ और हरा-भरा बनाया.

इमेज स्रोत, AP
लेकिन 1999 में उन्हें चार महीने तक जेल में रहना पड़ा. उन पर इस्लामी भावनाएं भड़काने का आरोप लगा.
वो सार्वजनिक तौर पर राष्ट्रवादी कविताएं पढ़ते हैं जिनमें ये लाइनें भी शामिल हैं: "मस्जिदें हमारे बैरेक हैं, गुम्बद हमारे कवच, मीनारें हमारी संगीन और सैनिक हमारे वफ़ादार."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












