9/11 हमले की ख़ुफ़िया रिपोर्ट जारी

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    • Author, ब्रजेश उपाध्याय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

अमरीकी कांग्रेस ने 11 सितंबर के हमले से जुड़ी एक रिपोर्ट के उन 28 पन्नों को सार्वजनिक कर दिया है जिसमें हमलावरों और सऊदी अरब के बीच संबंधों पर टिप्पणी की गई थी.

शुक्रवार को जारी इस गुप्त दस्तावेज़ के अनुसार सऊदी हुकू़मत और इन हमलावरों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं नज़र आता, लेकिन ये संभव है कि उन्हें देश के अंदर कुछ लोगों से आर्थिक मदद मिली हो.

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इस दस्तावेज़ को सार्वजनिक किए जाने के लिए कांग्रेस और अमरीकी प्रशासन के बीच बरसों से बहस चल रही थी. हमले में मारे गए लोगों के परिजन भी इसे जारी करने के लिए ख़ासा दबाव डाल रहे थे.

ये गुप्त दस्तावेज़ 11 सितंबर के हमलों पर 2002 की कांग्रेस की साझा जांच रिपोर्ट का हिस्सा हैं.

कई अमरीकी अधिकारी इन पन्नों को जारी किए जाने के ख़िलाफ़ थे क्योंकि उनका मानना था कि इससे अमरीका और सऊदी अरब के कूटनीतिक रिश्तों पर असर पड़ेगा. लेकिन माना जा रहा है कि इन दस्तावेज़ों के जारी किए जाने के बावजूद सऊदी अरब की भूमिका पर सवाल उठते रहेंगे.

11 सितंबर के 19 हमलावरों में से 15 सऊदी नागरिक थे.

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रिपोर्ट में कहा गया है, "एफ़बीआई और सीआईए के दस्तावेज़ों के अनुसार ग्यारह सितंबर के कुछ हमलावर जब अमरीका में थे तो संभवत: उनके ऐसे लोगों से ताल्लुकात थे जो सऊदी सरकार से जुड़े हुए थे."

रिपोर्ट में कहा गया है ओमर अल बयूमी नामक एक सऊदी ख़ुफ़िया अधिकारी दो हमलावरों से कैलिफ़ोर्निया के सैन डिएगो शहर में एक सार्वजनिक जगह पर मिला था.

एफ़बीआई के फ़ाइलों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलावरों के कैलिफ़ोर्निया पहुंचने के दो महीने के बाद इस अधिकारी का वेतन 465 डॉलर प्रति माह से बढ़कर 3,700 डॉलर प्रति माह हो गया था.

एक पन्ने में इस बात का विवरण है कि 1999 में दो हमलावर फ़ीनिक्स से वॉशिंगटन की उड़ान के दौरान विमान कर्मचारियों से विमान की तकनीकी चीज़ों के बारे में पूछताछ कर रहे थे. दोनों ही वॉशिंगटन में सऊदी दूतावास में एक पार्टी में शामिल होने जा रहे थे.

रिपोर्ट के अनुसार उनमें से एक ने दो बार कॉकपिट में घुसने की भी कोशिश की थी. विमान को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी. एफ़बीआई ने इसकी जांच पड़ताल भी की लेकिन कोई मुकदमा नहीं दायर हुआ.

इन पन्नों में ये भी कहा गया है कि जांच के दौरान ये जानकारी भी हासिल हुई कि "अमरीका में मौजूद सऊदी हुकूमत के अधिकारियों के अल क़ायदा और दूसरे आतंकवादी गुटों के साथ संबंध रहे हों". लेकिन जिस आयोग ने ये रिपोर्ट लिखी उनका ये भी कहना है कि इसमें से बहुत सी जानकारी की "स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है."

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अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की सर्वोच्च कमान संभालने वाली ऑफ़िस ऑफ़ दी डायरेक्टर ऑफ़ नैशनल इंटेलीजेंस (डीएनआई) का भी कहना है कि रिपोर्ट के जारी किए जाने का ये मतलब नहीं है ख़ुफ़िया एजेंसियां इसमें शामिल की गई जानकारियों से सहमत हैं.

अमरीका में सऊदी अरब के राजदूत ने कहा है कि उनका देश इन पन्नों के जारी किए जाने का स्वागत करता है.

उनका कहना था, "हम उम्मीद करते हैं कि इनके जारी होने से सऊदी अरब की भूमिका और मंशा पर जो भी सवाल थे वो दूर हो जाएंगे."

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व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉश अरनेस्ट ने पन्नों के जारी होने से पहले ही बयान दिया कि उनमें ग्यारह सितंबर के हमलों में सऊदी अरब की भूमिका से संबंधित कोई सबूत नहीं हैं.

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